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वोट चोरी के आरोपों पर बोले BJP नेता देवशाली- देश में अस्थिरता फैलाने का प्रयास कर रही कांग्रेस

भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं नगर निगम के पूर्व पार्षद शक्ति प्रकाश देवशाली ने कांग्रेस नेतृत्व, विशेषकर राहुल गांधी द्वारा लगाए गए तथाकथित "वोट चोरी" के आरोपों पर कहा कि यह ये आरोप न केवल निराधार हैं, बल्कि भारत की लोकतांत्रिक...
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भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं नगर निगम के पूर्व पार्षद शक्ति प्रकाश देवशाली ने कांग्रेस नेतृत्व, विशेषकर राहुल गांधी द्वारा लगाए गए तथाकथित "वोट चोरी" के आरोपों पर कहा कि यह ये आरोप न केवल निराधार हैं, बल्कि भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया और उसकी स्वतंत्र संस्थाओं की गरिमा पर भी सीधा प्रहार हैं।

देवशाली ने कहा कि 2024 के संसदीय चुनावों में कांग्रेस ने पिछले 35 वर्षों का अपना सर्वोच्च वोट शेयर हासिल किया। यह तथ्य अपने आप में राहुल गांधी और कांग्रेस के "वोट चोरी" संबंधी आरोपों को पूरी तरह गलत और भ्रामक साबित करता है।

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देवशाली ने स्पष्ट किया कि भारतीय चुनाव आयोग द्वारा अपनाई गई चुनावी प्रक्रिया अपनी पारदर्शिता, निष्पक्षता और दक्षता के लिए विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त है। चुनाव आयोग, एक स्वायत्त संवैधानिक निकाय के रूप में, कानून के अनुसार स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराता है। ऐसे में, कांग्रेस द्वारा इन संस्थाओं की विश्वसनीयता पर संदेह जताना, वस्तुतः जनता द्वारा उन्हें लगातार नकारे जाने से उपजी निराशा का परिणाम है।

इतिहास का उल्लेख करते हुए देवशाली ने कहा कि कांग्रेस का “वोट चोरी” का अपना एक काला इतिहास रहा है। वर्ष 1952 में संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर को हराने के लिए कांग्रेस ने 74,000 से अधिक वोट रद्द करवा दिए थे। इस अन्याय के विरुद्ध बाबा साहेब ने भारतीय चुनाव इतिहास की पहली 18 पन्नों की चुनाव याचिका स्वयं दायर की थी।

इसी प्रकार, 1952 के आम चुनाव में जब मौलाना अबुल कलाम आज़ाद उत्तर प्रदेश के रामपुर से बिशन चंद्र सेठ से हार गए थे, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के माध्यम से हस्तक्षेप कर दबाव बनाया। फलस्वरूप विजयी उम्मीदवार की मतपेटी से मतपत्र जबरन निकलवाए गए और मौलाना आज़ाद की मतपेटी में डलवाकर उन्हें विजयी घोषित कर दिया गया।

देवशाली ने कहा कि आज राहुल गांधी अपनी पार्टी की लगातार नाकामियों को छिपाने के लिए केवल बहानेबाज़ी और बयानबाज़ी का सहारा ले रहे हैं। रचनात्मक राजनीति से दूर रहते हुए वे षड्यंत्र के सिद्धांतों और दुष्प्रचार पर जोर दे रहे हैं। जनादेश का सम्मान करने के बजाय, कांग्रेस नेतृत्व मतदाताओं का अपमान कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर कर रहा है और विदेशी ताक़तों के इशारे पर देश में अस्थिरता फैलाने का प्रयास कर रहा है।

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