Fertility डायबिटीज रोक सकती है मातृत्व-पितृत्व का सपना
भारत को डायबिटीज़ कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड कहा जाता है। यहां 10 करोड़ से अधिक लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं। यह सिर्फ दिल, किडनी और नसों को प्रभावित नहीं करती, बल्कि कई परिवारों का सबसे बड़ा सपना मां-बाप बनने का सपना छीन सकती है।
महिलाओं पर असर
अनियंत्रित डायबिटीज़ महिलाओं के हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ देती है। इसके कारण माहवारी अनियमित हो जाती है, गर्भधारण कठिन हो जाता है और गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है। यही नहीं, यह पीसीओएस, गर्भकालीन डायबिटीज़ और समय से पहले मेनोपॉज़ जैसी समस्याओं को भी जन्म देती है।
पुरुषों पर असर
डायबिटीज़ पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर घटा देती है, जिससे यौन इच्छा कम हो जाती है और शुक्राणुओं की गुणवत्ता प्रभावित होती है। लंबे समय तक बीमारी रहने पर इरेक्टाइल डिसफंक्शन और बांझपन का खतरा भी बढ़ जाता है।
विशेषज्ञ की राय
फर्टिलिटी एक्सपर्ट डॉ. वंदना नरूला (FOGSI) कहती हैं कि आज 20–30 साल के युवा भी डायबिटीज़ से जुड़ी प्रजनन समस्याओं का सामना कर रहे हैं। लगातार बैठकर काम करना, असंतुलित खानपान, तनाव और मोटापा इसके प्रमुख कारण हैं। यदि ब्लड शुगर नियंत्रित रखा जाए तो यह स्वास्थ्य और प्रजनन क्षमता दोनों के लिए फायदेमंद है। जो दंपति परिवार बढ़ाने की सोच रहे हैं, उन्हें प्री-कंसेप्शन काउंसलिंग अवश्य लेनी चाहिए।
क्या करें?
- लो-ग्लाइसेमिक डाइट लें (साबुत अनाज, हरी सब्ज़ियाँ, फल, दालें, मेवे, मछली आदि)
- नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद ज़रूर लें
- तनाव नियंत्रित रखें
- ब्लड शुगर की नियमित जाँच करवाते रहें
डॉ. नरूला बताती हैं कि शुरुआती मामलों में इंट्रायूटेरिन इन्सेमिनेशन (IUI) और जटिल स्थितियों में IVF-ICSI जैसे आधुनिक उपचार उपलब्ध हैं। समय पर जागरूकता और जीवनशैली में बदलाव अपनाकर दंपति मातृत्व-पितृत्व की खुशी पा सकते हैं।