Classical Resonance पीजीजीसी-11 में शास्त्रीय संगीत का जादू, सात्विक वीणा की गूंज से गूंजा सभागार
Classical Resonance संगीत जब साधना बन जाए और सुर जब आत्मा को छू लें, तो श्रोता केवल सुनते ही नहीं, बल्कि अनुभव करते हैं। शुक्रवार को राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय सेक्टर-11 के सभागार में ठीक ऐसा ही नजारा था। सोसाइटी फॉर द प्रमोशन ऑफ इंडियन क्लासिकल म्यूज़िक एंड कल्चर अमंग यूथ (स्पिक मैके ) के सहयोग से आयोजित इस भावपूर्ण संगीत समारोह में शास्त्रीय सुरों और तालों का अद्भुत संगम हुआ, जिसने हर उपस्थित व्यक्ति को भारतीय सांगीतिक परंपरा की गहराई से जोड़ दिया।
इस अवसर पर सात्विक वीणा के प्रख्यात वादक पंडित सलिल भट्ट ने अपनी प्रस्तुति से ऐसा सम्मोहन रचा कि सभागार में बैठे लोग मंत्रमुग्ध होकर सुरों की यात्रा में खो गए। उनकी वीणा से निकले मधुर स्वर जब हॉल में गूंजे तो लगा मानो संगीत आत्मा से संवाद कर रहा हो। तबले पर संगत कर रहे कुंवर कौशिक ने अपनी सधी हुई लय और ऊर्जावान थापों से प्रस्तुति में नई जान डाल दी। दोनों कलाकारों की जुगलबंदी ने विशेष रूप से कर्नाटक संगीत के राग चारु की मनमोहक प्रस्तुति को अविस्मरणीय बना दिया।
कार्यक्रम केवल प्रस्तुति तक सीमित नहीं रहा। कलाकारों ने श्रोताओं और विद्यार्थियों से संवाद भी किया और भारतीय शास्त्रीय संगीत को हमारी 'अविनाशी सांस्कृतिक धरोहर' बताते हुए इसे एक भारत, श्रेष्ठ भारत की जीवंत अवधारणा से जोड़ा।
इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्य, शिक्षकगण, विद्यार्थी और शहर के संगीत प्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सुर और ताल से सजे इस आयोजन ने जहां भारतीय शास्त्रीय संगीत की गहराई और समृद्धि को उजागर किया, वहीं स्पिक मैके के उस मिशन को भी बल दिया, जिसके तहत युवाओं तक संस्कृति, परंपरा और मूल्यों का संवर्धन किया जाता है।