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15वां चंडीगढ़ राष्ट्रीय क्राफ्ट मेला : कंवर ग्रेवाल ने बांधा सूफियाना सुरुर

चंडीगढ़ के कलाग्राम में चल रहा 15वां राष्ट्रीय क्राफ्ट मेला शनिवार को संगीत, नृत्य और कला का अनूठा संगम बन गया। पंजाब के लोकप्रिय सूफी गायक कंवर ग्रेवाल ने अपने दमदार सुरों से ऐसा सूफियाना रंग जमाया कि पूरा प्रांगण...

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चंडीगढ़ के कलाग्राम में चल रहा 15वां राष्ट्रीय क्राफ्ट मेला शनिवार को संगीत, नृत्य और कला का अनूठा संगम बन गया। पंजाब के लोकप्रिय सूफी गायक कंवर ग्रेवाल ने अपने दमदार सुरों से ऐसा सूफियाना रंग जमाया कि पूरा प्रांगण तालियों और हुंकारों से गूंज उठा। उनकी प्रस्तुति ने मेले के दूसरे दिन को यादगार बना दिया।

कंवर ग्रेवाल ने ‘इश्क बुल्ले नू नचावे...’, ‘ना जाईं मस्तां दे वेड़े...’, ‘मस्त बना देन गे बिबा...’ और ‘छल्ला’ जैसे हिट गानों से ऐसा माहौल बनाया कि दर्शक लगातार झूमते रहे। ‘टिकटां दो लैंली...’, ‘वाज फकीरां दी...’ और ‘तू गड़वा मैं तेरी डोर...’ की धुनों ने संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। ओपन स्टेज पर प्रस्तुति को लेकर उन्होंने कहा कि यहां आने वाले श्रोता बेहद समझदार होते हैं और उनसे बनने वाली केमिस्ट्री हर कलाकार के लिए बेहद खास होती है।

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फोक सिंफनी और लोक नृत्यों ने जीता दिल

कंवर की प्रस्तुति से पहले देशभर के वाद्ययंत्रों और नृत्य शैलियों का भव्य रंग बिखरा। खरताल, रबाब, मोरचंग और पुंग जैसे वाद्ययंत्रों ने मिलकर ऐसी फोक सिंफनी रची कि पूरा माहौल उत्साह से भर उठा। उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक फुरकान खान की इस प्रस्तुति ने दर्शकों पर गहरा प्रभाव छोड़ा। इसके बाद कोरियोग्राफर सुशील शर्मा के निर्देशन में करीब डेढ़ दर्जन राज्यों के लोकनृृत्यों की शानदार कोरियोग्राफिक प्रस्तुति ने खूब तालियां बटोरी।

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जीत्ती जगजीत की सुरमई शाम

शाम का अगला रंग राजस्थान के सूफी गायक जीत्ती जगजीत लेकर आए। ‘तुम्हें दिल्लगी भूल जानी पड़ेगी...’, ‘मस्त नजरों से अल्लाह बचाए...’, ‘छाप तिलक सब छीनी...’ और ‘दमादम मस्त कलंदर...’ जैसे गीतों ने दर्शकों को सुरों की मदहोशी में डुबो दिया। ‘चंडीगढ़ वालिए’ सुनकर ट्राइसिटी के लोगों में एक अलग ही उत्साह दिखा। उनके ‘साजन राजी हो जावे...’ और ‘मामला गड़बड़ है...’ जैसे गीतों ने भी खूब तालियां बटोरीं।

दिनभर लोकनृत्यों की धूम, बच्चों ने जीते क्विज पुरस्कार

दिन के सत्र में हिमाचल का सिरमौर नाटी, जम्मू कश्मीर का धमाली, मध्यप्रदेश का गुडुम बाजा, छत्तीसगढ़ का गौर मारिया, मणिपुर का पुंग चोलम, पंजाब का लुड़्डी और पश्चिम बंगाल का नटुआ लोक नृत्य दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहे। बच्चों ने क्विज में उत्साहपूर्वक भाग लिया और कठिन सवालों के जवाब देकर पुरस्कार जीते। क्विज का संचालन जयपुर के डॉ. सौरभ भट्ट ने किया।

स्टाल्स पर उमड़ी भीड़, शिल्प उत्पादों ने खींचा ध्यान

कलाग्राम में लगे स्टाल्स देशभर से आए शिल्पकारों के हस्तनिर्मित उत्पादों से सजे हैं। इत्र, पत्थर की कलाकृतियां, लकड़ी और धातु से बने सजावटी सामान, मट्टी के आइटम्स, दस्तकार हैंडलूम और अन्य हस्तशिल्पों ने खरीदारों का खूब ध्यान आकर्षित किया। कई शिल्पकार लाइव डेमो देते हुए मौके पर ही उत्पाद तैयार कर रहे हैं, जिन्हें आगंतुक हाथोंहाथ खरीद रहे हैं।

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