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गुरुग्राम में पहली साइंस सिटी

हरियाणा की पहली साइंस सिटी एनसीआर के गुरुग्राम में स्थापित होगी। इसके लिए नाथूपुर गांव के अरावली जैव विविधता पार्क को अंतिम रूप दिया जा रहा है। केंद्र सरकार के सहयोग से यह साइंस सिटी विकसित होगी। पूर्व में अम्बाला में साइंस सिटी बनाने की योजना थी। इसके लिए बजट भी था लेकिन योजना पर […]
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हरियाणा की पहली साइंस सिटी एनसीआर के गुरुग्राम में स्थापित होगी। इसके लिए नाथूपुर गांव के अरावली जैव विविधता पार्क को अंतिम रूप दिया जा रहा है। केंद्र सरकार के सहयोग से यह साइंस सिटी विकसित होगी। पूर्व में अम्बाला में साइंस सिटी बनाने की योजना थी। इसके लिए बजट भी था लेकिन योजना पर काम नहीं होने की वजह से बजट लैप्स हो गया। अब अम्बाला में राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद के वित्तीय और तकनीकी सहयोग से उप-क्षेत्रीय विज्ञान केंद्र स्थापित होगा।
पंचकूला को आईटी पार्क
ट्राईसिटी के पंचकूला शहर में सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क स्थापित किया जाएगा यह पार्क सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क ऑफ इंडिया का सेंटर होगा। इसका एक सेंटर पहले से ही साइबर सिटी में संचालित है और पंचकूला का यह पार्क इसकी एक्सटेंशन के तौर पर काम करेगा। पंचकूला में घग्गर पार पहले ही सरकार आईटी पार्क स्थापित कर चुकी है, लेकिन इसमें अभी तक बड़ी आईटी कंपनियां नहीं आई थी।
केएमपी पर पांच सिटी
कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेस-वे पर 5 आधुनिक सिटी विकसित करने की योजना भी बजट में शामिल हो गई हैं। ‘पंचग्राम’ नामक इस योजना को सिरे चढ़ाने के लिए सरकर ने पंचग्राम प्राधिकरण का गठन किया है। ग्लोबल इकोनॉमिक कॉरिडोर को भी इसके साथ कनेक्ट किया जाएगा।
खरखौदा-सोहाना में आईएमटी
केएमपी के साथ सटे शहरों एवं कस्बों में औद्योगिक विकास के लिए खरखौदा में 3300 एकड़ भूमि पर अत्याधुनिक औद्योगिक एवं वाणिज्यिक टाउनशिप विकसित होगी। इसी तरह से सोहाना में 1400 एकड़ भूमि पर औद्योगिक मॉडल टाउनशिप विकसित होगी। वहीं दिल्ली-मुंबई इंडस्िट्रयल कॉरिडोर प्रोजेक्ट के तहत नारनौल-महेंद्रगढ़ में 1000 एकड़ भूमि में इंटीग्रेटिड मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स कब विकसित होगा।
कुरुक्षेत्र में कम्युनिटी रिजर्व
कुरुक्षेत्र के थाना गांव में ब्रह्मासर तीर्थ के रूप में प्रसिद्ध ब्रह्मासर आर्द्रभूमि को कम्युनिटी रिजर्व घोषित किया गया है। अब सरकार इस स्थल को संवारने के लिए गतिविधियां शुरू करेगी। झज्जर के भिंडवास वन्य प्राणी विहार को भी विकसित कर इसे पर्यटन स्थल बनाया जाएगा। मोरनी में वर्ल्ड हर्बल फोरेस्ट के लिए 550 हेक्टेयर भूमि पर औषधीय पौधे रोपे गए हैं। औषधीय पौधों की अंकुरण गुणवत्ता बढ़ाने के लिए एक हाईटैक इंडस्ट्री स्थापित होगी।
100 जलवायु स्मार्ट गांव
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ‘स्केलिंग-अप क्लाइमेंट स्मार्ट विलेजिज’ योजना के तहत राज्य में 100 जलवायु स्मार्ट गांव विकसित किए जाएंगे।

अब जलभराव से होगा कारोबार
चरखी-दादरी, झज्जर और जींद के सैकड़ों गांवों में सेमग्रस्त भूमि में जलभराव की समस्या से निपटने की भी योजना बनाई है। इन क्षेत्रों का विकास हरियाणा मत्स्य संसाधन विकास प्राधिकरण करेगा। जलभराव वाले 16 हजार हैक्टेयर क्षेत्र का चयन करके इसमें मत्स्य पालन का फैसला लिया है। इससे मछलियां का उत्पादन भी बढ़ेगा।

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