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World Map Revision: संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत का बड़ा फैसला, विश्व मानचित्र सुधार प्रस्ताव के पक्ष में वोट

World Map Revision: भारत ने महाद्वीपों के भूभाग को ''अधिक सटीकता से प्रदर्शित'' करने के उद्देश्य से विश्व मानचित्र में सुधार से जुड़े संयुक्त राष्ट्र महासभा के एक प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 193...

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सांकेतिक फोटो
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World Map Revision: भारत ने महाद्वीपों के भूभाग को ''अधिक सटीकता से प्रदर्शित'' करने के उद्देश्य से विश्व मानचित्र में सुधार से जुड़े संयुक्त राष्ट्र महासभा के एक प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 193 सदस्यों ने शुक्रवार को 'मानचित्र में सुधार: वैश्विक मानचित्रण प्रतिनिधित्व में संतुलन कायम करना और दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों, विशेष रूप से अफ्रीका का समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना' शीर्षक वाले प्रस्ताव को भारी बहुमत से पारित किया।

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टोगो द्वारा पेश प्रस्ताव के पक्ष में 164 देशों ने मतदान किया। एस्टोनिया, जॉर्जिया, लिथुआनिया, मोल्दोवा, सर्बिया और यूक्रेन मतदान के दौरान अनुपस्थित रहे जबकि अमेरिका ने इसके खिलाफ मतदान किया। प्रस्ताव में कहा गया कि 16वीं सदी में नौवहन के उद्देश्य से तैयार 'मर्केटर प्रोजेक्शन' का अब भी शैक्षणिक सामग्री, मीडिया, डिजिटल मंचों और आधिकारिक दस्तावेजों में व्यापक इस्तेमाल होता है जबकि इसमें भूमध्य रेखा से दूर उत्तर और दक्षिण के भूभागों के आकार में काफी विकृति दिखाई देती है।

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प्रस्ताव में इस बात पर भी ''चिंता'' जताई गई कि ''इस विकृति के कारण अफ्रीका, लातिन अमेरिका और दक्षिण एशिया का आकार वास्तविकता की तुलना में छोटा दिखाई देता है और दुनिया की असंतुलित तस्वीर बनी रहती है।''

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में प्रथम सचिव रघु पुरी ने महासभा में मतदान पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि भारत अधिक सटीक और संतुलित मानचित्रण पद्धतियों को बढ़ावा देने के प्रस्ताव के उद्देश्य का ''स्वागत'' करता है।

उन्होंने कहा, ''हमारा मानना है कि इसमें मानचित्रों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है कि समाज भूगोल और अपने आसपास की दुनिया के विभिन्न हिस्सों के तुलनात्मक आकार को किस तरह समझता है।''

भारत ने हालांकि, प्रस्ताव के दायरे को लेकर अपनी समझ स्पष्ट करते हुए कहा, ''हमारा मानना है कि इस प्रस्ताव का उद्देश्य 'इक्वल एरिया' (समान क्षेत्रफल दर्शाने वाली) मानचित्रण पद्धतियों के व्यापक इस्तेमाल को बढ़ावा देना और उन पर विचार करना है, न कि 'इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन' या किसी अन्य खास मानचित्रण पद्धति का समर्थन करना।''

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