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West Asia Tension : अमेरिका में बढ़ रहा युद्ध खत्म करने का दबाव, जनता की नाराजगी पर ट्रंप ने जताई चिंता

मुझे पक्का नहीं पता कि अमेरिका के लोगों में ईरान के साथ युद्ध को जारी रखने का धैर्य है या नहीं: ट्रंप

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West Asia Tension : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि उन्हें पक्का नहीं पता है कि अमेरिका के लोगों में ईरान के साथ चल रहे युद्ध को जारी रखने का धैर्य है या नहीं। अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय व्हाइट हाउस में ईस्टर से संबंधित दोपहर के भोजन के दौरान उनकी निजी टिप्पणियां इस बात का संकेत देती हैं कि राष्ट्रपति पर युद्ध को समाप्त करने के लिए घरेलू दबाव बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका ''बहुत आसानी'' से ईरान का तेल अपने नियंत्रण में ले सकता है, लेकिन यह ''दुर्भाग्यपूर्ण'' है कि अमेरिकी जनता में इसके लिए धैर्य नहीं दिख रहा है। लोग इस युद्ध को खत्म होते देखना चाहते हैं। ट्रंप ने कहा कि वह ईरान के तेल पर कब्जा करना चाहते हैं, ''लेकिन देश के लोग कहते हैं- बस जीत हासिल करो। तुम बहुत बड़ी जीत के करीब हो। बस जीतकर घर लौट आओ।'' उन्होंने कहा, ''मुझे इससे भी कोई दिक्कत नहीं है।'' उनके इस भाषण का वीडियो 'बिजनेस इनसाइडर' के एक रिपोर्टर ने ऑनलाइन पोस्ट किया।

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रिपोर्टर के अनुसार, व्हाइट हाउस ने बंद कमरे में हुए इस कार्यक्रम का वीडियो अपलोड किया था, जिसे उन्होंने बाद में निजी कर दिए जाने से पहले डाउनलोड कर लिया। इस वीडियो को हटाने के कारण पर व्हाइट हाउस ने 'एसोसिएटेड प्रेस' के सवालों का कोई जवाब नहीं दिया। इस निजी भोज कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने यह भी कहा कि चीन, जापान और दक्षिण कोरिया को हॉर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने में शामिल होना चाहिए।

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इससे पहले भी ट्रंप ने उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के सहयोगियों पर नाराजगी जताई थी, क्योंकि वे ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल की कार्रवाई पूरी होने तक इस जलडमरूमध्य की सुरक्षा में शामिल होने को लेकर हिचकिचा रहे थे। बुधवार को व्हाइट हाउस में आयोजित इस निजी भोज कार्यक्रम में ट्रंप ने कुछ एशियाई देशों पर भी नाराजगी जतायी, जो अमेरिका की तुलना में खाड़ी देशों के तेल पर अधिक निर्भर हैं। ट्रंप ने इस दौरान नाटो को ''बहुत खराब सहयोगी और कागजी शेर भी बताया।

उन्होंने कहा, ''नाटो ने हमारे साथ बहुत बुरा व्यवहार किया है और इसे याद रखना चाहिए, क्योंकि अगर हमें कभी उनकी जरूरत पड़ी तो वे फिर ऐसा ही करेंगे। उम्मीद है कि हमें उनकी जरूरत कभी नहीं पड़ेगी। मुझे नहीं लगता कि वे बहुत कुछ कर सकते हैं। अगर कभी कोई बड़ा युद्ध हुआ, तो नाटो हमारे साथ नहीं होगा।''

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