US Court Order: अदालत ने H-1B वीजा पर एक लाख डॉलर शुल्क रद्द किया, अमेरिका-भारतीय संगठनों में खुशी
US Court Order: अमेरिका के रिपब्लिकन सांसदों समेत अन्य सांसदों ने एच1बी वीजा आवेदनों पर लगाए गए एक लाख अमेरिकी डॉलर के शुल्क को निरस्त करने वाले संघीय अदालत के फैसले का स्वागत किया है। रिपब्लिकन सांसदों ने एच1बी वीजा...
US Court Order: अमेरिका के रिपब्लिकन सांसदों समेत अन्य सांसदों ने एच1बी वीजा आवेदनों पर लगाए गए एक लाख अमेरिकी डॉलर के शुल्क को निरस्त करने वाले संघीय अदालत के फैसले का स्वागत किया है।
रिपब्लिकन सांसदों ने एच1बी वीजा के उस पहलू पर जोर दिया, जिसके तहत स्वास्थ्यकर्मियों और शिक्षकों की भर्ती होती है। इनकी विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में कमी है। उन्होंने सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र की अपेक्षा इन पेशेवरो की जरूरतों को अधिक महत्व दिया, जबकि एच1बी वीजा का सबसे अधिक लाभ आईटी क्षेत्र को मिलता है।
रिपब्लिकन सांसद लीजा मुरकोवस्की ने कहा, "राज्य के देहात एवं दूरदराज़ क्षेत्रों के कई जिले अपने यहां स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षकों की भर्ती के करने के लिये एच1 बी वीजा कार्यक्रम पर निर्भर हैं।"
बीच व्हाइट हाउस के एक प्रवक्ता ने संकेत दिया कि संघीय अदालत के इस आदेश को अपीलीय अदालत में चुनौती दी जाएगी। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता टेलर रोजर्स ने कहा, "एच1बी वीजा कार्यक्रम का दशकों से दुरुपयोग होता रहा है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आखिरकार इसे सुधारने के लिए कदम उठाया है।"
रोजर्स ने कहा, "वॉशिंगटन की एक संघीय अदालत पहले ही लगभग इसी तरह के आदेश को बरकरार रख चुकी है और प्रशासन को विश्वास है कि अपील में इस आदेश को पलट दिया जाएगा।"
कांग्रेस सदस्य डॉन बेयर ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "मुझे यह देखकर खुशी हुई कि अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए अवैध एच-1बी वीजा शुल्क पर रोक लगा दी। इस शुल्क के कारण देशभर में पहले से ही कर्मचारियों की कमी से जूझ रही स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी संस्थाओं पर अतिरिक्त खर्च और अनावश्यक बोझ पड़ रहा था।"
भारतीय प्रवासी संगठनों ने स्वागत किया
अमेरिका के ट्रंप प्रशासन द्वारा एच-1बी वीजा पर लगाए गए एक लाख अमेरिकी डॉलर के शुल्क को रद्द करने के मैसाचुसेट्स की संघीय अदालत के फैसले का अमेरिका में भारतीय प्रवासी हितों की पैरवी करने वाले संगठनों ने स्वागत किया है।
उनका कहना है कि यह निर्णय अमेरिका की नवाचार और उद्यमिता में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त बनाए रखने के लिए उचित है। फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज (एफआईआईडीएस) में नीति एवं रणनीति प्रमुख खंडेराव कंड ने कहा, "हम मैसाचुसेट्स की संघीय अदालत के उस निर्णय का स्वागत करते हैं, जिसने एच-1बी वीजा शुल्क के रूप में लगाए गए एक लाख अमेरिकी डॉलर के शुल्क को निरस्त कर दिया है।
इससे रोजगार-आधारित आव्रजन प्रणाली में निश्चितता और निष्पक्षता बहाल होगी।" इंडियास्पोरा के कार्यकारी निदेशक संजीव जोशीपुरा ने कहा, "अदालत के आदेश से एच-1बी वीजा से जुड़े सभी हितधारकों को राहत मिलेगी, लेकिन यह सवाल बना हुआ है कि क्या यह वास्तव में इस मुद्दे का अंत है।"
