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Moon Base Mission : स्पेस मिशन में भारत-अमेरिका की नई साझेदारी, NASA ने ISRO को ‘मून बेस’ के लिए आमंत्रित किया

नासा ने भारत को 'मून बेस मिशन' में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया

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Moon Base Mission : अंतरिक्ष क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़े कदम के तहत, नासा ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास मनुष्यों के लिए ठिकाना बनाने के अपने महत्वाकांक्षी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। 'मून बेस मिशन' नामक इस परियोजना का उद्देश्य चालक दल वाले और मानवरहित अभियानों की एक सीरिज के जरिए अंतरिक्ष यात्रियों के रहने, काम करने और खोज-अन्वेषण के लिए एक स्थायी ठिकाना स्थापित करना है।

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अनुसार, इस परियोजना का उद्देश्य वैज्ञानिक खोज के रास्ते खोलना और भविष्य में अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए तैयारी करना है। भारत और अमेरिका ने पिछले सप्ताह बेंगलुरु में अपने नागरिक अंतरिक्ष संयुक्त कार्य समूह (सीएसजेडब्ल्यूजी) की बैठक में अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग को और विस्तार देने के विकल्पों पर चर्चा की। इस संबंध में जारी एक बयान में कहा गया, ''नासा ने इसरो को अपने मून बेस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। यह दोनों देशों के बीच आर्टेमिस समझौते के तहत जारी साझेदारी को आगे बढ़ाने की दिशा में एक कदम है।''

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इसमें कहा गया कि दोनों पक्षों ने आर्टेमिस समझौते के तहत खुले वैज्ञानिक डेटा साझा करने के क्षेत्र में सहयोग को लेकर चर्चा आगे बढ़ाने पर भी सहमति जताई। इस बैठक में 'अमेरिका-भारत ट्रांसफॉर्मिंग द रिलेशनशिप यूटिलाइजिंग स्ट्रैटेजिक टेक्नोलॉजी (ट्रस्ट)' पहल के तहत नागरिक और वाणिज्यिक अंतरिक्ष सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। ट्रस्ट पहल की शुरुआत पिछले साल फरवरी में हुई थी। इसका उद्देश्य रक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), सेमीकंडक्टर, क्वांटम, जैव प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।

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संयुक्त बयान में कहा गया, ''दोनों पक्षों ने पिछले साल नासा-इसरो के संयुक्त सिंथेटिक अपर्चर रडार (निसार) मिशन के सफल प्रक्षेपण के बाद सहयोग को और विस्तार देने के साथ-साथ भविष्य में विज्ञान और मानव अंतरिक्ष उड़ान प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की।'' भारतीय पक्ष की ओर से बैठक की सह-अध्यक्षता इसरो के यूआर राव उपग्रह केंद्र के निदेशक एम शंकरन ने की। अमेरिकी पक्ष की सह-अध्यक्षता महासागर एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण एवं वैज्ञानिक मामलों के सहायक विदेश सचिव वेस्ली ब्रूक्स और नासा की अंतरराष्ट्रीय एवं अंतर-एजेंसी संबंधों की सह-प्रशासक कैथलीन कारिका ने की।

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