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Middle East Tension : 47 वोट पड़े, फिर भी नहीं रुकी बात; ट्रंप को नहीं लगा झटका, ईरान पर सैन्य कार्रवाई रोकने का प्रस्ताव सीनेट में अटका

ईरान पर सैन्य कार्रवाई रोकने का प्रस्ताव अमेरिकी सीनेट में फिर विफल

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प। फाइल फोटो
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Middle East Tension : अमेरिकी सीनेट ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई रोकने संबंधी युद्ध शक्तियों के प्रस्ताव को मंगलवार को एक बार फिर आगे बढ़ाने की कोशिश की, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली। यह प्रस्ताव ऐसे समय लाया गया, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अधिकारों पर अंकुश लगाने के लिए सांसद लगातार प्रयास कर रहे हैं और उनका प्रशासन लगभग चार महीने से जारी युद्ध को समाप्त करने की नयी योजना पर विचार कर रहा है।

मतदान में प्रस्ताव के पक्ष में 47 और विरोध में 48 वोट पड़े। चार रिपब्लिकन सांसदों ने अधिकांश डेमोक्रेट सदस्यों के साथ मिलकर युद्ध शक्तियों से जुड़े इस प्रस्ताव का समर्थन किया, लेकिन इसे आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक बहुमत नहीं मिल सका। यह नौवीं बार है जब सांसदों ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को रोकने से संबंधित प्रस्ताव लाने की कोशिश की है। इस कार्रवाई को लेकर सांसदों में लागत, रणनीति और संघर्ष के अंतिम लक्ष्य को लेकर लगातार चिंता बनी हुई है।

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डेमोक्रेटिक सांसद राफेल वार्नॉक ने मतदान से पहले कहा कि राष्ट्रपति की ''बिना अनुमति वाली सैन्य कार्रवाई'' पर रोक लगाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सही कदम उठाने का समय हमेशा सही होता है। रिपब्लिकन सांसद लिसा मुर्कोव्स्की, सुसान कोलिन्स, रैंड पॉल और बिल कैसिडी ने प्रस्ताव के समर्थन में वोट दिया, जबकि डेमोक्रेट सीनेटर जॉन फेटरमैन ने इसका विरोध किया। सीनेट में यह भी चर्चा जारी है कि ट्रंप प्रशासन द्वारा ईरान के साथ किए जा रहे किसी भी संभावित समझौते पर संसद की भूमिका क्या होगी।

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कुछ सांसदों का मानना है कि ऐसे किसी भी समझौते को कांग्रेस की मंजूरी मिलनी चाहिए, जबकि अन्य इसे अनिवार्य नहीं मानते। सीनेटर टिम काइन इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के प्रमुख समर्थकों में शामिल हैं और उन्होंने कहा है कि जब तक कांग्रेस की अनुमति नहीं मिलती, तब तक सैन्य कार्रवाई पर रोक जरूरी है। वहीं, 2015 के ईरान परमाणु समझौता समीक्षा कानून के तहत यह प्रावधान है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े किसी भी समझौते को अमेरिकी कांग्रेस के समक्ष समीक्षा के लिए पेश किया जाना चाहिए। इस मुद्दे पर भी सीनेट में आगे बहस जारी है।

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