तेहरान में भारतीय छात्र सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट
गहराता जा रहा है पश्चिम एशियाई संकट । पीएम मोदी ने खाड़ी देशों के नेताओं से की बात
अमेरिका-इस्राइल द्वारा ईरान पर हमला करने और जवाबी कार्रवाई के बाद पश्चिम एशियाई देशों में संकट गहरा गया है। उधर, भारत ने मंगलवार को ईरान की राजधानी तेहरान से छात्रों को शहर के बाहर सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया है। दूतावास ने उनके लिए परिवहन, भोजन और आवास की व्यवस्था भी की है। केवल कुछ छात्र हैं जिन्होंने तेहरान छोड़ने से मना कर दिया। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्षेत्र में लगभग एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई पश्चिम एशियाई देशों के नेताओं से बात की है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक, कुवैत के युवराज शेख सबाह अल-खालिद अल-हमद अल-मुबारक अल-सबाह और कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी से बात की और हालात पर चिंता जतायी। टेलीफोन पर हुई बातचीत में मोदी ने भारतीय समुदाय के लोगों की सुरक्षा पर भी चर्चा की। पिछले 48 घंटों में पीएम मोदी ने यूएई, इस्राइल, सऊदी अरब, जॉर्डन, बहरीन, ओमान, कुवैत और कतर के नेताओं से बात की है। अबू धाबी में भारतीय दूतावास ने नागरिकों को अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। उधर, ईरान में अब तक 787 लोगों की मौत हो गयी है। इस बीच, हमले में ईरान का नतांज परमाणु स्थल क्षतिग्रस्त हुआ है। उधर, सीबीएसई ने पश्चिम एशिया क्षेत्र में पांच और छह मार्च को होने वाली 10वीं तथा 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं को स्थगित कर दिया है। आगे की परीक्षाओं के लिए स्थिति की समीक्षा पांच मार्च को की जाएगी।
सोनिया ने सरकार पर उठाए सवाल
कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मंगलवार को ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या पर केंद्र की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार की चुप्पी ‘तटस्थ नहीं बल्कि त्याग है’ और साथ ही चेताया कि यह घटना के मौन समर्थन का संकेत देती है। सोनिया ने कहा कि तेहरान ने 1 मार्च को पुष्टि की थी कि एक दिन पहले किए गए अमेरिका और इस्राइल के हमलों में खामेनेई मारे गए। सोनिया ने इस घटनाक्रम को समकालीन अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में एक गंभीर दरार बताया।
भारत ने किया अंतर-मंत्रालयी समूह का गठन
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कहा कि सरकार ने पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रमों पर करीबी नजर रखने के लिए एक अंतर-मंत्रालयी समूह का गठन किया है। निर्यातकों ने आशंका जताई है कि अमेरिका और इसाइल के ईरान पर संयुक्त हमलों के कारण पश्चिम एशिया क्षेत्र में बढ़ते तनाव का भारत के व्यापार पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। बजट के बाद आयोजित एक वेबिनार को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा, ‘हमने एक अंतर-मंत्रालयी समूह का गठन किया है ताकि हमारे पोत परिवहन, लॉजिस्टिक, निर्यात या यहां तक कि महत्वपूर्ण आयात में किसी भी तरह की कमजोर रुख का आकलन किया जा सके। हम अंतर-मंत्रालयी स्तर पर कार्रवाई करेंगे।’
हमला इसलिए क्योंकि ईरान कुछ ही महीनों में परमाणु शक्ति देश बन जाता : नेतन्याहू
यरूशलम : इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इस्राइल और अमेरिका ने ईरान पर हमला इसलिए किया क्योंकि तेहरान ने अपना परमाणु कार्यक्रम फिर से शुरू कर दिया था और वह ‘कुछ ही महीनों में परमाणु प्रतिरक्षा प्राप्त कर लेता।’ नेतन्याहू ने मंगलवार को फॉक्स न्यूज से कहा कि अगर अभी कोई कार्रवाई नहीं की जाती, तो भविष्य में भी कोई कार्रवाई नहीं हो पाती।
सऊदी अरब में अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन हमला : ईरान ने मंगलवार को सऊदी अरब में अमेरिकी दूतावास को निशाना बनाया। सऊदी अरब ने ईरानी ड्रोन हमले की बात स्वीकार की और अमेरिकियों से फिलहाल दूतावास से दूर रहने का आग्रह किया। इस बीच, अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने 6 देशों में अपने उन कर्मचारियों और उनके परिवारों को निकालने का आदेश दिया है, जिनकी वहां तत्काल जरूरत नहीं है।
लंबी लड़ाई के लिए अमेरिका तैयार : ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका पांच सप्ताह या उससे अधिक समय तक चलने वाली लंबी लड़ाई के लिए तैयार है। ट्रंप ने ईरान में सेना की तैनाती की संभावना से भी इनकार नहीं किया। अमेरिकी अखबार ‘न्यूयॉर्क पोस्ट’ ने ट्रंप के हवाले से कहा कि सैनिकों की तैनाती ‘संभवतया’ आवश्यक नहीं होगी, लेकिन अगर जरूरत पड़ी तो सैनिकों को तैनात किया जा सकता है। अमेरिका को बहरीन, जॉर्डन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और यूएई से भी समर्थन मिला है और उन्होंने एक संयुक्त बयान जारी कर ईरान की निंदा की और उसके कार्यों को 'लापरवाह और अस्थिर करने वाला' बताया।

