प्रयागराज के शक्तिधाम

अलोपी देवी, ललिता देवी, कल्याणी देवी

अलोपी देवी, ललिता देवी, कल्याणी देवी

अभिनव ‘गुप्त’

भगवती दुर्गा के शक्तिपीठों के प्रति सनातनी श्रद्धालुओं में अपार श्रद्धा का भाव है। सम्पूर्ण भारत में स्थापित इन देवी पीठों में दर्शनार्थ उमड़ने वाली भीड़ इस कथन की पुष्टि करती है। यद्यपि माता के शक्तिपीठों की संख्या और पहचान को लेकर विभिन्न विद्वानों के अपने-अपने मत हैं। प्रमुख रूप से उन तीर्थों को शक्तिपीठ कहा गया, जहां-जहां माता सती के शरीर के विभिन्न अंग गिरे।

मान्यतानुसार प्रयागराज में माता सती के दाहिने हाथ की अंगुलियां गिरी थीं। अतः संगम नगरी का आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व यहां स्थापित मां अम्बे के शक्तिपीठ के कारण अधिक बढ़ जाता है। प्रमुख रूप से प्रयाग में देवी माता के तीन पौराणिक मंदिर हैं- अलोपी देवी, ललिता देवी और कल्याणी देवी। अलोपी देवी का मंदिर दारागंज क्षेत्र में है। तंत्रचूड़ामणि में इस तीर्थ का उल्लेख मिलता है। यहां माता के दर्शन एक झूले के रूप में होते हैं, जो एक चबूतरे पर स्थापित है। झूले (खटोले) के नीचे चबूतरे पर एक छोटा-सा कुंड है, जिसमें जल भरा रहता है। भक्तजन झूले को माता के प्रतीक रूप में ही शीश नवाते हैं। गंगा घाट इस मंदिर के निकट ही है।

शक्तिपीठ के रूप में ही पूजित ललिता देवी का प्रसिद्ध मंदिर यमुना किनारे के मीरापुर क्षेत्र में है। यहां माता का प्राचीन विग्रह विराजमान है। मंदिर प्रांगण में भोलेनाथ शिवलिंग रूप में सुशोभित हैं। ललिता देवी मंदिर के निकट कुछ ही दूरी पर माता कल्याणी देवी का मंदिर है। प्रयाग की अधिष्ठात्री देवी माता कल्याणी देवी को माना जाता है। तंत्रचूड़ामणि में उल्लेख आता है ‘अंगुली वृन्दहस्तस्य प्रयागे ललिता भव’ अर्थात‍् सती माता की अंगुलियां गिरने से प्रयाग में ललिता देवी एवं भव नामक भैरव प्रतिष्ठित हुए। मत्स्य पुराण के वर्णित 108 शक्तिपीठों में भी माता कल्याणी व ललिता देवी का नाम मिलता है। ब्रह्म वैवर्त पुराण के अनुसार त्रेता युग में महर्षि याज्ञवल्क्य जी ने मां की आराधना करके कल्याणी देवी शक्तिपीठ पर 32 अंगुल की प्रतिमा स्थापित की। मां कल्याणी को ही महर्षि भारद्वाज की अधिष्ठात्री देवी कहा गया है। प्रत्येक वर्ष चैत्र एवं आश्विन मास के नवरात्र में इन देवी पीठों पर श्रद्धालु लंबी-लंबी कतारों में लग कर दर्शन प्राप्त करते हैं। मेले के दौरान यहां का दृश्य अति मनोहारी होता है। कथा, सत्संग इत्यादि में भक्तजन बढ़-चढ़ कर भाग लेते हैं। प्रसाद, फल-फूल, खाने-पीने एवं अन्य प्रकार की सामग्री की दुकानें खूब सजी होती हैं। मां अम्बे के यह शक्ति स्थल संगम नगरी प्रयागराज की शोभा में रत्नों के समान हैं। संगम में स्नान की चाह में दूर से आने वाले भक्तजन देवी के दर्शन प्राप्त करके अपनी यात्रा को सफल बनाते हैं।

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