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तू जहां-जहां चलेगा, मेरा साया साथ होगा... 71 साल बाद BRICS में फिर गूंजा नेहरू का 'बैंडुंग स्पिरिट', जयराम रमेश ने यूं समझाया कनेक्शन

71 साल बाद फिर चर्चा में आया बैंडुंग, जयराम रमेश बोले- वैश्विक मंच पर आज भी साथ चल रहा नेहरू का साया

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BRICS Summit 2026 : नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान अपनाए गए New Delhi Declaration 2026 में 1955 के एशियाई-अफ्रीकी सम्मेलन यानी बैंडुंग कॉन्फ्रेंस का जिक्र हुआ। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इसी संदर्भ को पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की कूटनीतिक विरासत से जोड़ते हुए कहा कि दशकों बाद भी ग्लोबल साउथ की राजनीति में नेहरू की सोच की छाप दिखाई देती है।

रमेश ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि घोषणापत्र का पैराग्राफ 16 बैंडुंग स्पिरिट को एक निष्पक्ष, समावेशी और प्रतिनिधित्व वाली बहुपक्षीय व्यवस्था की दिशा में अहम संदर्भ मानता है।

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‘तू जहां जहां चलेगा, मेरा साया साथ होगा...’

जयराम रमेश ने इस ऐतिहासिक जुड़ाव को मशहूर बॉलीवुड गीत की पंक्ति से जोड़ते हुए लिखा- "तू जहां जहां चलेगा, मेरा साया साथ होगा।" उनका इशारा इस बात की ओर था कि बदलती वैश्विक राजनीति के बीच भी नेहरू की विदेश नीति और ग्लोबल साउथ को लेकर उनकी सोच आज की कूटनीति में दिखाई देती है। उन्होंने इतिहासकार विनीत ठाकुर के अध्ययन का भी जिक्र किया, जिसमें 1955 के बैंडुंग सम्मेलन के दौरान नेहरू की निजी टिप्पणियों और नोट्स का विश्लेषण किया गया है।

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भाषणों की लंबाई से लेकर बड़े वैश्विक मुद्दों तक

नेहरू के निजी नोट्स से पता चलता है कि बैंडुंग सम्मेलन केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित नहीं था। वह भाषणों की लंबाई तक पर नजर रखते थे। कई बार सम्मेलन की लंबी प्रक्रियाओं से परेशान होकर उन्होंने अपने नोट्स में नाम और टिप्पणियां दर्ज कीं, लेकिन इसी दौरान ऐसे फैसले भी हुए, जिनका असर आने वाले दशकों की वैश्विक राजनीति पर पड़ा। फिलिस्तीन के मुद्दे को ग्लोबल साउथ के एजेंडे में प्रमुखता मिलने और चीन-अमेरिका के बीच बातचीत की संभावनाएं बनने में भी बैंडुंग सम्मेलन की भूमिका महत्वपूर्ण रही।

1955 में क्या था ‘बैंडुंग स्पिरिट’?

अप्रैल 1955 में एशिया और अफ्रीका के 29 देशों के प्रतिनिधि इंडोनेशिया के बैंडुंग में जुटे थे। सम्मेलन का फोकस शांति, उपनिवेशवाद से मुक्ति, आर्थिक विकास और शीत युद्ध के दौर में विकासशील देशों की स्वतंत्र भूमिका पर था। इसकी मूल भावना में राजनीतिक आत्मनिर्णय, संप्रभुता का सम्मान, गैर-आक्रामकता, आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना और समानता जैसे सिद्धांत शामिल थे।

BRICS घोषणा में भारत के लिए कई अहम संदेश

नई दिल्ली घोषणा में भारत और ब्राजील की संयुक्त राष्ट्र में बड़ी भूमिका की आकांक्षा का समर्थन किया गया। चीन और रूस ने भी दोनों देशों की UN में, जिसमें सुरक्षा परिषद भी शामिल है, अधिक भूमिका की आकांक्षा के समर्थन की बात दोहराई। BRICS नेताओं ने सुरक्षा परिषद में सुधार को भी समर्थन दिया, ताकि वैश्विक संस्था अधिक लोकतांत्रिक, प्रतिनिधित्वपूर्ण और प्रभावी बन सके।

गौरतलब है कि घोषणापत्र में जम्मू-कश्मीर में अप्रैल 2025 में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की गई और आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की बात कही गई। वहीं व्यापार के मोर्चे पर एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों पर चिंता जताई गई।

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