Tribune
PT
Subscribe To Print Edition About the Dainik Tribune Code Of Ethics Advertise with us Classifieds Download App
Add Tribune As Your Trusted Source
search-icon-img
Advertisement

NEET में नहीं मिली MBBS सीट, टूट गया डॉक्टर बनने का सपना; KBC में छलका चाय बेचने वाले पिता की बेटी प्रगति का दर्द

चाय बेचने वाले पिता की बेटी ने हॉट सीट पर सुनाई संघर्ष की कहानी, 12 लाख के सवाल ने बदला खेल

  • fb
  • twitter
  • whatsapp
  • whatsapp
Advertisement

अमिताभ बच्चन के लोकप्रिय क्विज शो ‘कौन बनेगा करोड़पति 18’ में इस बार महाराष्ट्र के अमरावती की प्रगति दिनेश कल्पेकर ने अपनी कहानी से दर्शकों का दिल जीत लिया। प्रगति ने सिर्फ सवालों के जवाब नहीं दिए, बल्कि अपने परिवार के संघर्ष, टूटे सपनों और फिर खड़े होने की हिम्मत की कहानी भी साझा की। प्रगति अमरावती के डिविजनल इन्फॉर्मेशन ऑफिस में जूनियर क्लर्क के तौर पर काम करती हैं।

उनके पिता चाय की दुकान चलाते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति आसान नहीं थी, लेकिन माता-पिता ने बच्चों की पढ़ाई को हमेशा प्राथमिकता दी। प्रगति ने बताया कि बचपन में वह अपने नाना-नानी के घर रहकर पढ़ाई करती थीं। इसी वजह से वह अपने छोटे भाई से अलग रहीं। हालात ऐसे रहे कि भाई को करीब पांच साल की उम्र तक यह भी पता नहीं था कि उसकी एक बहन है। यह किस्सा सुनाते हुए प्रगति की आंखों में संघर्षों की याद साफ नजर आई।

Advertisement

डॉक्टर बनने का सपना टूटा, भाई ने बढ़ाया हौसला

प्रगति कभी डॉक्टर बनना चाहती थीं। उन्होंने NEET की तैयारी की, लेकिन MBBS में सीट नहीं मिल सकी। उन्हें BDS में दाखिला लेना पड़ा। दोस्तों को MBBS में जाते देखकर उन्हें निराशा हुई और आत्मविश्वास भी कमजोर हुआ। मुश्किल समय में उनके छोटे भाई ने उन्हें संभाला। प्रगति के मुताबिक, भाई ने बड़े भाई की तरह उनका मार्गदर्शन किया और उन्हें दूसरे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रेरित किया। अब उनका सपना आगे चलकर IFS अधिकारी बनने का है।

Advertisement

12 लाख के सवाल पर अटका खेल

KBC की हॉट सीट पर प्रगति ने शानदार खेल दिखाया और बिना लाइफलाइन इस्तेमाल किए 25 हजार रुपये तक पहुंचीं। इसके बाद वह 12 लाख रुपये के सवाल तक पहुंचीं। सवाल था कि 1914 में कनाडा के इमिग्रेशन नियमों को चुनौती देने के लिए कोमागाटा मारू जहाज किसने किराए पर लिया था? प्रगति ने विकल्प करतार सिंह सराभा चुना, जबकि सही जवाब बाबा गुरदित सिंह था।

उनके पास 50:50 लाइफलाइन मौजूद थी, लेकिन उन्होंने उसका इस्तेमाल नहीं किया। गलत जवाब के बाद उनकी रकम घटकर 5 लाख रुपये रह गई। हालांकि KBC से मिली यह रकम उनके लिए सिर्फ इनाम नहीं, बल्कि संघर्षों के बीच हासिल की गई एक बड़ी जीत भी है।

Advertisement
×