बिल भरने तक के पैसे नहीं थे... इसलिए दुनिया जीतकर भी 'अंडररेटेड' रह गए ओम पुरी, पवन मल्होत्रा का बड़ा खुलासा
'टामस' के दौरान आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे ओम पुरी, मैंने अंग्रेज़ी भी ओम पुरी से सीखी; पवन मल्होत्रा
Bollywood News : दिग्गज अभिनेता पवन मल्होत्रा ने भारतीय सिनेमा के महान कलाकार ओम पुरी को याद करते हुए कई भावुक और चौंकाने वाले किस्से साझा किए हैं। उन्होंने बताया कि 1988 की चर्चित टीवी फिल्म 'टामस' की शूटिंग के दौरान ओम पुरी आर्थिक तंगी से गुजर रहे थे। हालात ऐसे थे कि उनके पास अपने बिल तक चुकाने के पैसे नहीं थे। पवन के मुताबिक, यह बात खुद ओम पुरी ने उनसे साझा की थी। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी प्रतिभा होने के बावजूद ओम पुरी ने कभी पैसे, शोहरत या लग्जरी लाइफ को प्राथमिकता नहीं दी। उनके लिए अभिनय ही सबसे बड़ा जुनून था।
बॉलीवुड से पहले दुनिया में बना चुके थे पहचान
पवन मल्होत्रा का मानना है कि ओम पुरी उन पहले भारतीय कलाकारों में थे जिन्होंने विदेशी फिल्मों में अपनी मजबूत पहचान बनाई। उन्होंने कहा कि प्रियंका चोपड़ा, दीपिका पादुकोण या इरफान खान से काफी पहले ओम पुरी अंतरराष्ट्रीय सिनेमा में शानदार काम कर चुके थे। हालांकि उन्होंने कभी अपनी उपलब्धियों का प्रचार नहीं किया, इसलिए उनके काम को वह पहचान नहीं मिली जिसके वे हकदार थे।
'उस दौर में नहीं था PR और सोशल मीडिया का दौर'
पवन ने कहा कि ओम पुरी जिस दौर में काम करते थे, उस समय फिल्मों का प्रमोशन आज जैसा नहीं होता था। न सोशल मीडिया था, न पीआर एजेंसियां और न ही बड़े-बड़े प्रमोशनल कैंपेन। कलाकार सिर्फ अपने काम से पहचाने जाते थे। ओम पुरी भी हमेशा यही मानते थे कि अभिनय बोले, कलाकार नहीं।
'उनकी एक्टिंग क्रीम की तरह स्मूद थी'
ओम पुरी की अभिनय शैली की तारीफ करते हुए पवन मल्होत्रा ने कहा कि उनकी एक्टिंग बेहद सहज, स्वाभाविक और हर बार अलग होती थी। उन्होंने कहा कि कई कलाकारों की अपनी एक तय शैली होती है, लेकिन ओम पुरी हर किरदार में बिल्कुल नए नजर आते थे। उनकी आवाज़ पर पकड़ भी कमाल की थी। पवन ने अमिताभ बच्चन और ओम पुरी को उन चुनिंदा अभिनेताओं में बताया, जो अपनी आवाज़ के उतार-चढ़ाव और भावनाओं को बखूबी नियंत्रित कर सकते थे।
ओम पुरी से सीखी अंग्रेज़ी, विरासत आज भी प्रेरणा
पवन मल्होत्रा ने यह भी बताया कि उन्होंने ओम पुरी को सुन-सुनकर अंग्रेज़ी बोलना सीखा। उनके उच्चारण, संवाद बोलने के अंदाज और व्यक्तित्व से उन्हें काफी सीखने को मिला। दो राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और पद्मश्री से सम्मानित ओम पुरी ने समानांतर सिनेमा, व्यावसायिक फिल्मों और अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स में अपनी अमिट छाप छोड़ी।

