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Epstein जैसा मामला... पत्नी फांसती थी मासूमों को, इंजीनियर पति बनाता था अश्लील वीडियो, अब मिली सजा-ए-मौत  

POCSO Case: यह मामला भी किसी एपस्टीन से कम नहीं है... यूपी के बांदा जिले की एक विशेष अदालत ने सिंचाई विभाग के एक निलंबित अवर अभियंता रामभवन व उसकी पत्नी दुर्गावती को 33 नाबालिग बच्चों का यौन शोषण करने...

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POCSO Case: यह मामला भी किसी एपस्टीन से कम नहीं है... यूपी के बांदा जिले की एक विशेष अदालत ने सिंचाई विभाग के एक निलंबित अवर अभियंता रामभवन व उसकी पत्नी दुर्गावती को 33 नाबालिग बच्चों का यौन शोषण करने और उनके अश्लील वीडियो व तस्वीरें विदेश भेजने के मामले में दोषी करार देते हुए मृत्युदंड दिया।

मामला अक्टूबर 2020 उजागर हुआ था। दरअसल, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को अंतरराष्ट्रीय पुलिस संगठन इंटरपोल से एक इनपुट मिला था। जांच एजेंसी को प्राप्त डिजिटल सामग्री में कई बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक वीडियो और तस्वीरें थीं। डिजिटल ट्रैकिंग के आधार पर स्रोत उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र से जुड़ा पाया गया। 31 अक्टूबर 2020 को नई दिल्ली में मामला दर्ज किया गया और जांच शुरू हुई।

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16 नवंबर 2020 को सीबीआई की टीम ने चित्रकूट स्थित SDM कॉलोनी में छापा मारा। तलाशी के दौरान कई मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, पेन ड्राइव, मेमोरी कार्ड और बड़ी संख्या में आपत्तिजनक डिजिटल सामग्री बरामद की गई। इसके अलावा नकदी भी जब्त की गई। कुछ दिनों बाद आरोपी की पत्नी को भी गिरफ्तार कर लिया गया।

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जांच में आरोप सामने आए कि दंपती ने कथित तौर पर 5 से 16 वर्ष आयु के 50 से अधिक बच्चों को निशाना बनाया। पत्नी बच्चों को लालच देकर घर बुलाती और पति उनके साथ यौन शोषण कर वीडियो बनाता। बाद में इन वीडियो को डार्क वेब और विदेशी पोर्न साइट्स के माध्यम से बेचे जाने का आरोप है।

न्यूज-18 की एक रिपोर्ट के अनुसार पड़ोसियों को कभी भी इस दंपती पर शक नहीं हुआ। दरअसल, इस दंपती का अपना कोई बच्चा नहीं। पति-पत्नी दोनों समाज में ज्यादा घुलते मिलते नहीं थी। लोग उन्हें शालीन व्यक्तित्व मानते थे, लेकिन जब उनकी हरकतों क परतें खुलीं तो लोग भौंचक्के रह गए।

सीबीआई को मामले की जांच के दौरान सामने आया कि दंपती चित्रकूट जिले में किराये के मकान पर रहता था। रामभवन ने कभी भी सरकारी मकान नहीं लिया।

मेडिकल जांच और गवाही

जांच के दौरान कई पीड़ित बच्चों का मेडिकल परीक्षण कराया गया। विशेष पॉक्सो अदालत में 25 पीड़ित बच्चों ने बयान दर्ज कराए। सुनवाई के दौरान कुल 74 गवाह पेश किए गए, जिनमें डॉक्टर, शिक्षक और डिजिटल विशेषज्ञ शामिल थे।

ऐसी चली अदालत की कार्यवाही

  • 24 फरवरी 2021 को बांदा कोर्ट में चार्जशीट दाखिल हुई।
  • 2023 में आरोप तय किए गए।
  • 5 जून 2023 से विशेष पॉक्सो कोर्ट में नियमित सुनवाई शुरू हुई।
  • 20 फरवरी 2026 को अदालत ने 163 पन्नों का फैसला सुनाया।

अदालत ने दंपति को तत्कालीन भारतीय दंड संहिता की धारा 377 (अप्राकृतिक दुष्कर्म), 506 (आपराधिक धमकी) और 120 बी (आपराधिक साजिश), पॉक्सो अधिनियम के संबंधित प्रावधानों और आईटी एक्ट के तहत दोषी ठहराया।

विशेष न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा ने कहा कि यह अपराध अत्यंत जघन्य है और समाज पर गहरा दुष्प्रभाव डालने वाला है। अदालत ने दोनों दोषियों को मौत होने तक फांसी की सजा सुनाई। अदालत ने प्रत्येक पीड़ित बच्चे को एक-एक लाख रुपये क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया। साथ ही राज्य और केंद्र सरकार को 10-10 लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए।

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