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West Asia Conflict: ट्रंप की अपील के बाद चीन बोला- पश्चिम एशिया में तुरंत रुके सैन्य कार्रवाई

West Asia Conflict: ट्रंप ने चीन समेत अन्य देशों से वैश्विक समुद्री परिवहन के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने में सहयोग करने का आह्वान किया है

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रविवार को लेबनान के बेरूत शहर के मध्य में इस्राइली हमले के बाद क्षतिग्रस्त इमारत के पास एक व्यक्ति सीढ़ी लेकर खड़ा है। रॉयटर्स
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West Asia Conflict: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच चीन ने सभी पक्षों से तुरंत सैन्य कार्रवाई रोकने की अपील की है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने चीन समेत अन्य देशों से वैश्विक समुद्री परिवहन के लिए अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने में सहयोग करने का आह्वान किया है।

दरअसल, इरान ने अमेरिका और इस्राइल के हवाई हमलों के जवाब में होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है। इस कदम से वैश्विक ऊर्जा और व्यापार आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे तेल आपूर्ति में बड़ा व्यवधान आया है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है।

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चीन ने एक बयान में कहा कि पश्चिम एशिया में मौजूदा स्थिति बेहद संवेदनशील है और सभी पक्षों को संयम बरतते हुए सैन्य कार्रवाई तुरंत रोकनी चाहिए, ताकि हालात और बिगड़ने से बचाए जा सकें।

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बीजिंग ने यह भी बताया कि वह अमेरिकी पक्ष के साथ इस महीने के अंत में प्रस्तावित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा को लेकर बातचीत कर रहा है।

गौरतलब है कि चीन ईरान का करीबी सहयोगी माना जाता है और वह ईरान से रियायती दरों पर तेल भी आयात करता है। चीन ने अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों की निंदा की है और अमेरिकी हवाई हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामनेई की मौत की भी आलोचना की है।

ट्रंप ने करीब सात देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य की रक्षा के लिए युद्धपोत भेजने की अपील की

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि उन्होंने लगभग सात देशों से युद्धपोत भेजने की मांग की है, ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखा जा सके। बहरहाल, ईरान युद्ध के बीच तेल की कीमतों में तेजी के बावजूद उनकी अपील पर अभी तक किसी देश ने ठोस प्रतिबद्धता नहीं जतायी है।

ट्रंप ने उन देशों के नाम बताने से इनकार कर दिया, जो पश्चिम एशिया के कच्चे तेल पर काफी हद तक निर्भर हैं और जिनसे अमेरिकी प्रशासन इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा के लिए एक गठबंधन बनाने को लेकर बातचीत कर रहा है। इस जलमार्ग से दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का व्यापारिक तेल गुजरता है।

ट्रंप ने कहा, ''मैं इन देशों से मांग कर रहा हूं कि वे आगे आएं और अपने क्षेत्र की सुरक्षा करें क्योंकि यह उनका ही क्षेत्र है।'' उन्होंने फ्लोरिडा से वाशिंगटन लौटते समय एयर फोर्स वन विमान में पत्रकारों से बातचीत में यह भी दावा किया कि यह समुद्री मार्ग अमेरिका के लिए उतना जरूरी नहीं है, क्योंकि अमेरिका के पास तेल तक अपनी पहुंच है।

ट्रंप ने कहा कि चीन को लगभग 90 प्रतिशत तेल इसी मार्ग से मिलता है, जबकि अमेरिका को वहां से बहुत कम तेल मिलता है। हालांकि उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया कि क्या चीन इस गठबंधन में शामिल होगा। इससे पहले ट्रंप चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन से इसमें शामिल होने की अपील कर चुके हैं।

इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने 'सीबीएस' से कहा कि तेहरान से ''कई देशों ने अपने जहाजों को सुरक्षित गुजरने देने के लिए संपर्क किया है लेकिन इस बारे में फैसला हमारे सैन्य अधिकारियों को करना है।''

उन्होंने कहा कि ''कई देशों'' के कुछ जहाजों को गुजरने की अनुमति दी गई है, हालांकि उन्होंने इसके बारे में अधिक जानकारी नहीं दी। ईरान ने कहा है कि यह जलडमरूमध्य सभी देशों के लिए खुला है, लेकिन अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए नहीं। अराघची ने यह भी कहा कि युद्ध समाप्त करने के लिए अमेरिका से बातचीत करने का उन्हें कोई कारण नजर नहीं आता, क्योंकि उनके अनुसार इस्राइल और अमेरिका ने 28 फरवरी को समन्वित हमलों के साथ इस लड़ाई की शुरुआत की थी, जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका-ईरान के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता चल रही थी।

अमेरिका में चीन के दूतावास के प्रवक्ता लियु पेंग्यू ने कहा कि ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर और निर्बाध बनाए रखना सभी पक्षों की जिम्मेदारी है और चीन तनाव कम करने के लिए संवाद बढ़ाएगा। इधर युद्ध का असर पूरे क्षेत्र में बढ़ता जा रहा है। 'इंटरनेशनल कमिटी फॉर रेड क्रॉस' के अनुसार, ईरान में 1,300 से अधिक लोग मारे गए हैं, जिनमें सैकड़ों महिलाएं और बच्चे शामिल हैं।

इस्राइल में भी ईरानी मिसाइल हमलों में कम से कम 12 लोगों की मौत हुई है। वहीं, लेबनान में ईरान समर्थित हिजबुल्ला और इस्राइल के बीच संघर्ष में 820 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं।

सोमवार तड़के ईरान ने फिर इस्राइल की ओर मिसाइलें दागीं। इससे मध्य इस्राइल और तेल अवीव क्षेत्र में कई जगह नुकसान हुआ। इस्राइली सेना का कहना है कि ईरान क्लस्टर बमों का इस्तेमाल कर रहा है, जो हवाई रक्षा प्रणालियों को चकमा देकर कई स्थानों पर छोटे विस्फोटक गिराते हैं।

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