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US-WHO Separation : ट्रंप प्रशासन का बड़ा कदम; 78 साल की साझेदारी खत्म, WHO से बाहर हुआ अमेरिका

अमेरिका ने डब्ल्यूएचओ से हटने की प्रक्रिया पूरी की

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US-WHO Separation : अमेरिका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से हटने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। यह घटनाक्रम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वैश्विक स्वास्थ्य निकाय के प्रति वाशिंगटन की 78 साल पूरी प्रतिबद्धता खत्म किए जाने का नोटिस देने के लगभग एक साल बाद सामने आया है। हालांकि, इस सिलसिले में कुछ सवाल अभी भी अनसुलझे हैं। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, अमेरिका को वैश्विक स्वास्थ्य निकाय को 13 करोड़ अमेरिकी डॉलर देने हैं।

वहीं, ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि कुछ मुद्दों को अभी नहीं सुलझाया जा सका है, जिनमें अन्य देशों के स्वास्थ्य डेटा तक पहुंच शामिल है जो अमेरिका को किसी नयी महामारी के प्रति सजग करने के लिए अहम हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका के डब्ल्यूएचओ से अलग होने से न केवल नये स्वास्थ्य प्रकोपों ​​के खिलाफ वैश्विक प्रतिक्रिया प्रभावित होगी, बल्कि अमेरिकी वैज्ञानिकों और दवा कंपनियों की इनसे निपटने में सक्षम टीके एवं दवाएं विकसित करने की क्षमता पर भी असर पड़ेगा।

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जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय के सार्वजनिक स्वास्थ्य कानून विशेषज्ञ लॉरेंस गोस्टिन ने कहा, ''मेरी राय में, यह मेरे जीवनकाल में किसी राष्ट्रपति की ओर से लिया गया सबसे विनाशकारी फैसला है।'' डब्ल्यूएचओ संयुक्त राष्ट्र की वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी है, जिस पर मंकी पॉक्स, इबोला और पोलियो जैसे वैश्विक स्वास्थ्य खतरों के खिलाफ प्रतिक्रिया का समन्वय करने का जिम्मा है। यह गरीब देशों को तकनीकी सहायता भी प्रदान करता है; दुर्लभ टीकों, चिकित्सा आपूर्तियों और उपचारों तक पहुंच सुनिश्चित करने में मदद देता है; और मानसिक स्वास्थ्य तथा कैंसर सहित सैकड़ों स्वास्थ्य स्थितियों से निपटने के लिए दिशा-निर्देश निर्धारित करता है। दुनिया का लगभग हर देश इसका सदस्य है।

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अमेरिकी अधिकारियों ने डब्ल्यूएचओ की स्थापना में अहम भूमिका निभाई थी। यही नहीं, अमेरिका लंबे समय से डब्ल्यूएचओ के सबसे बड़े दानदाताओं में से एक रहा है, जो करोड़ों डॉलर की वित्तीय सहायता के साथ-साथ विशिष्ट स्वास्थ्य सेवा विशेषज्ञ मुहैया कराता आया है। अमेरिकी स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग के मुताबिक, अमेरिका डब्ल्यूएचओ को सदस्यता शुल्क के रूप में प्रति वर्ष औसतन 11.1 करोड़ अमेरिकी डॉलर और स्वैच्छिक योगदान के रूप में लगभग 57 करोड़ अमेरिकी डॉलर का भुगतान करता था। ट्रंप ने डब्ल्यूएचओ से अलग होने के फैसले के लिए कोविड-19 महामारी के दौरान कुप्रबंधन का हवाला दिया था।

जनवरी 2025 में राष्ट्रपति पद का कार्यभार संभालने के बाद जारी शासकीय आदेश में ट्रंप ने कहा था कि कोविड-19 महामारी और अन्य वैश्विक स्वास्थ्य संकटों से निपटने में संगठन के कुप्रबंधन के कारण अमेरिका डब्ल्यूएचओ से अलग होने जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ''बेहद आवश्यक सुधारों को अपनाने में एजेंसी की विफलता'' और ''सदस्य देशों के अनुचित राजनीतिक प्रभाव से इतर काम करने में उसकी असमर्थता'' का भी हवाला दिया था। विशेषज्ञों के अनुसार, कोविड-19 महामारी से निपटने के अपने रुख के कारण डब्ल्यूएचओ को काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्वास्थ्य निकाय ने एक समय लोगों को मास्क न पहनने की सलाह दी थी और यहां तक कहा था कि कोरोना वायरस हवा के जरिये नहीं फैलता।

हालांकि, बाद में उसे इन दोनों ही बातों से पलटना पड़ा था। विशेषज्ञों ने डब्ल्यूएचओ से हटने के ट्रंप प्रशासन के फैसले को वैश्विक स्वास्थ्य निकाय के लिए बड़ा झटका बताया है। उनका कहना है कि इससे पोलियो उन्मूलन के प्रयास, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम और नए संक्रमण खतरों की पहचान करने के लिए अनुसंधान सहित कई वैश्विक स्वास्थ्य पहलें पटरी से उतर सकती हैं। 'इंफेक्शियस डिजीज सोसाइटी ऑफ अमेरिका' के अध्यक्ष डॉ. रोनाल्ड नाहस ने अमेरिका के इस कदम को ''संकीर्ण दृष्टिकोण वाला, गलत और वैज्ञानिक रूप से गैरजिम्मेदाराना'' करार दिया। अमेरिका ने डब्ल्यूएचओ प्रायोजित समितियों, नेतृत्व निकायों, शासन संरचनाओं और तकनीकी कार्य समूहों में आधिकारिक भागीदारी बंद कर दी है।

इसमें संभवतः डब्ल्यूएचओ का वह समूह भी शामिल है, जो फ्लू के लिए जिम्मेदार वायरस के विभिन्न स्वरूपों का आकलन करता है और इनसे निपटने के लिए टीकों को अपडेट करने के बारे में महत्वपूर्ण निर्णय लेता है। ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि उनके पहले से ही कई देशों के साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी संबंध हैं और वे इस तरह की जानकारी को सीधे साझा करने के लिए काम कर रहे हैं, न कि विश्व स्वास्थ्य संगठन को मध्यस्थ के रूप में इस्तेमाल करने के लिए। लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने यह स्पष्ट नहीं किया कि ऐसे कितने समझौते प्रभावी हैं।

अमेरिका के लिए डब्ल्यूएचओ को उससे अलग होने से एक साल पहले इसकी सूचना देना कानूनी तौर पर अनिवार्य है-जो उसने किया भी। साथ ही अमेरिका को अपने सभी बकाया वित्तीय दायित्वों का भुगतान भी करना होगा। डब्ल्यूएचओ मुताबिक, अमेरिका ने 2024 और 2025 के लिए अपने किसी भी बकाया का भुगतान नहीं किया है, जिसके परिणामस्वरूप 13.3 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक का बकाया रह गया है। ट्रंप प्रशासन के एक शीर्ष अधिकारी ने बृहस्पतिवार को ऐसे किसी भी बकाये के भुगतान की आवश्यकता से यह कहते हुए इनकार किया कि अमेरिका पर सदस्यता वापस लेने से पहले भुगतान करने का कोई दायित्व नहीं था।

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