US Iran conflict 2026: अमेरिका ने ईरान के पोत पर किया कब्जा, होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ा तनाव
US Iran conflict 2026: नाकाबंदी तोड़ने की कोशिश का आरोप; तेहरान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी, तेल कीमतों में उछाल
US Iran conflict 2026: अमेरिका ने रविवार को होर्मुज जलडमरूमध्य के पास उसकी ''नौसैनिक नाकाबंदी से बचने की कोशिश कर रहे'' ईरानी ध्वज वाले एक मालवाहक पोत पर हमला कर उसे अपने कब्जे में ले लिया जिसके बाद ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
ईरानी बंदरगाहों पर पिछले सप्ताह अमेरिकी नाकेबंदी शुरू होने के बाद से यह पहली घटना है जब पोत को रोका गया। ईरान के सरकारी प्रसारणकर्ता के अनुसार, ईरान के संयुक्त सैन्य कमान ने सशस्त्र पोत को रोके जाने की घटना को ''समुद्री डकैती और युद्धविराम का उल्लंघन'' बताया।
जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव बढ़ गया है तथा बुधवार को मौजूदा युद्धविराम की अवधि समाप्त होने वाली है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहले की गई इस घोषणा का अब कोई औचित्य है या नहीं कि अमेरिकी वार्ताकार ईरान के साथ फिर से बातचीत के लिए सोमवार को पाकिस्तान जाएंगे। इस अनिश्चितता के कारण तेल की कीमतों में फिर तेजी आ गई।
इस घटनाक्रम से दशकों के सबसे गंभीर वैश्विक ऊर्जा संकटों में शामिल मौजूदा संकट के और गहराने का खतरा पैदा हो गया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि ओमान की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना के एक निर्देशित प्रक्षेपास्त्र विध्वंसक पोत ने ईरानी ध्वज वाले 'तुस्का' नामक पोत को रुकने की चेतावनी दी और फिर ''इंजन कक्ष में छेद कर उसे वहीं रोक दिया।''
उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आने वाले इस पोत को अमेरिकी मरीन ने अपने कब्जे में ले लिया है और वे ''देख रहे हैं कि उसमें क्या है।'' यह स्पष्ट नहीं है कि इस घटना में कोई घायल हुआ है या नहीं। 'यूएस सेंट्रल कमांड' ने इससे जुड़े सवालों का जवाब नहीं दिया लेकिन उसने कहा कि विध्वंसक पोत ने ''छह घंटे की अवधि में कई बार चेतावनी'' दी थी।
ईरानी अधिकारियों ने ट्रंप की वार्ता संबंधी घोषणा पर सीधे प्रतिक्रिया देते हुए कोई टिप्पणी नहीं की लेकिन ईरान की सरकारी मीडिया ने गोपनीय सूत्रों के हवाले से संक्षिप्त खबरें प्रसारित कीं जिनमें संकेत दिया गया कि वार्ता नहीं होगी।
पोत को जब्त किए जाने की घोषणा के कुछ ही मिनट बाद ईरानी सरकारी मीडिया ने बताया कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने रविवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से फोन पर बात की। इन खबरों में पेजेश्कियान के हवाले से कहा गया कि दबाव बनाने और अनुचित व्यवहार करने समेत अमेरिका की कार्रवाई इस संदेह को बढ़ाती है कि अमेरिका पहले की ही तरह आचरण करेगा और ''कूटनीतिक विश्वासघात'' करेगा।
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ईरान की सरकारी मीडिया के अनुसार, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक अन्य बातचीत में अपने पाकिस्तानी समकक्ष से कहा कि हालिया अमेरिकी कार्रवाइयां, बयानबाजी और विरोधाभास ''बुरी मंशा और कूटनीति के प्रति गंभीरता की कमी'' के संकेत हैं।
पाकिस्तान ने बातचीत के दूसरे दौर की पुष्टि नहीं की लेकिन इस्लामाबाद में सुरक्षा कड़ी की जा रही है। एक क्षेत्रीय अधिकारी ने अपनी पहचान गोपनीय रखे जाने की शर्त पर बताया कि मध्यस्थ तैयारियों को अंतिम रूप दे रहे हैं और अमेरिकी अग्रिम सुरक्षा दल मौके पर पहुंच चुके हैं।
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अमेरिका के राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय 'व्हाइट हाउस' ने कहा था कि पिछले सप्ताहांत 21 घंटे तक चली आमने-सामने की पहली ऐतिहासिक वार्ता का नेतृत्व करने वाले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे डी वेंस पाकिस्तान जाने वाले अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। उनके साथ अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जैरेड कुशनर भी होंगे। ईरान ने शनिवार को कहा था कि उसे अमेरिका की ओर से नए प्रस्ताव मिले हैं।
ईरानी तेल पर लगाई गई रोक की कीमत चुकानी पड़ेगी: तेहरान
ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने कहा है कि वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतें तभी स्थिर हो सकती हैं जब ईरानी के तेल निर्यात पर आर्थिक और सैन्य दबाव समाप्त किए जाएं। उपराष्ट्रपति ने 'एक्स' पर अपने पोस्ट में कहा, ''ईरान के तेल निर्यात पर रोक लगाकर दूसरों के लिए मुफ्त सुरक्षा की उम्मीद नहीं की जा सकती।'' उन्होंने कहा, '' विकल्प स्पष्ट है: या तो सभी के लिए एक मुक्त तेल बाजार या सभी के लिए भारी लागत का जोखिम।''
ईरान और अमेरिका के बीच जारी गतिरोध के कारण टैंकरों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने से रोके जाने की वजह से रविवार को शुरुआती कारोबार में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। 'शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज' में कारोबार फिर से शुरू होने के बाद अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत 6.4 प्रतिशत बढ़कर 87.88 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गई। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत 6.5 प्रतिशत बढ़कर 96.25 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गई।
ईरान का होर्मुज जलडमरूमध्य पर प्रभावी नियंत्रण है और उसने शुक्रवार को घोषणा की थी कि वह अपने तट से सटे इस मार्ग को वाणिज्यिक यातायात के लिए पूरी तरह से खोल देगा। इस खबर के बाद कच्चे तेल की कीमतों में नौ प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई थी।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा कर दी कि ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी जारी रहेगी, जिसके बाद तेहरान ने शनिवार को अपना निर्णय पलट दिया।
अमेरिका-इस्राइल का ईरान के खिलाफ युद्ध अब आठवें सप्ताह में है। इस युद्ध ने दशकों में सबसे भीषण वैश्विक ऊर्जा संकटों में से एक को जन्म दिया है। एशिया और यूरोप के वे देश जो पश्चिम एशिया से अपने तेल का एक बड़ा हिस्सा आयात करते हैं, आपूर्ति रुकने और उत्पादन में कटौती से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। वहीं पेट्रोल, डीजल और जेट ईंधन की तेजी से बढ़ती कीमतों ने दुनिया भर के व्यवसायों और उपभोक्ताओं को प्रभावित किया है।

