Tribune
PT
Subscribe To Print Edition About the Dainik Tribune Code Of Ethics Advertise with us Classifieds Download App
search-icon-img
Advertisement

ट्रंप ने उत्सर्जन से निपटने संबंधी पुराने कानूनी आधार को किया समाप्त, अमेरिकी नागरिकों के हितों को नुकसान पहुंचाने का दावा

ओबामा प्रशासन की 'क्लीन पावर प्लान' नीति तैयार की गई

  • fb
  • twitter
  • whatsapp
  • whatsapp
featured-img featured-img
डोनाल्ड ट्रंप। -फाइल फोटो
Advertisement

जलवायु उत्सर्जन को नियंत्रित करना अब और भी मुश्किल हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (ईपीए) ने 2009 के अपने उस कानूनी निष्कर्ष को रद्द कर दिया है कि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन से मानव स्वास्थ्य को खतरा है। साल 2007 में सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले से पुष्टि प्राप्त होने और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर तैयार किए गए ईपीए के इस तथाकथित 'खतरे संबंधी निष्कर्ष' ने संघीय सरकार को ग्रीनहाउस गैसों के विनियमन का कानूनी आधार प्रदान किया था।

इसी निष्कर्ष के आधार पर ओबामा प्रशासन की 'क्लीन पावर प्लान' नीति तैयार की गई, जिसके तहत बिजली संयंत्रों से होने वाले उत्सर्जन को नियंत्रित किया गया। अपने पहले कार्यकाल में ट्रंप ने इसे कमजोर करने की कोशिश की थी, लेकिन बाद में बाइडन प्रशासन ने इसका एक नया संस्करण लागू किया। 'खतरे की आशंका संबंधी निष्कर्षों' के अभाव में और जब तक कांग्रेस के दोनों सदनों द्वारा कोई नया कानून पारित नहीं किया जाता तब तक संघीय सरकार के पास ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के सीधे नियमन का कानूनी अधिकार नहीं रहता। विज्ञान नहीं बदला है, लेकिन उस पर कार्रवाई करने की बाध्यता को समाप्त कर दिया गया है।

Advertisement

यदि आप अमेरिका की कल्पना ग्रीनहाउस गैस से भरे बड़े-बड़े बर्तनों के एक समूह के रूप में करें, जिन पर ढक्कन लगे हों, तो ट्रंप प्रशासन उन ढक्कनों को एक-एक कर हटाता हुआ दिखाई देता है। जीवाश्म ईंधनों के उत्खनन, उत्पादन और खपत को बढ़ाकर वह अधिक उत्सर्जन को वातावरण में छोड़ रहा है। खतरे का निष्कर्ष क्या है और इसे कैसे तैयार किया गया था? 1970 में, जब अमेरिका में पर्यावरण आंदोलन अपने सबसे प्रभावशाली दौर में था, तब कांग्रेस ने एक महत्वपूर्ण कानून पारित किया, जिसे 'क्लीन एयर एक्ट' कहा गया।

Advertisement

इस कानून ने नवगठित पर्यावरण संरक्षण एजेंसी को यह अधिकार दिया कि यदि कोई तत्व सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा साबित होता है, तो उसे प्रदूषक घोषित किया जा सकता है। शुरुआत में इस कानून का उपयोग धुंध (स्मॉग) या कोयले की राख जैसे औद्योगिक उप-उत्पादों को नियंत्रित करने के लिए किया गया, जो उद्योगों से निकलने वाले प्रदूषक थे। जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान, पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (ईपीए) ने यह निर्णय दिया कि ग्रीनहाउस गैस भी 'क्लीन एयर एक्ट' के तहत प्रदूषक की श्रेणी में आती हैं।

इस निर्णय को 2007 में चुनौती दी गई। हालांकि, अदालत ने पांच बनाम चार न्यायाधीशों के बहुमत से यह फैसला सुनाया कि कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य ग्रीनहाउस गैस "वायु प्रदूषक" हैं, जो मानव स्वास्थ्य और कल्याण के लिए खतरा उत्पन्न करती हैं। अदालत ने ईपीए को इनके प्रभाव का आकलन करने का निर्देश दिया - जिससे एजेंसी को इन्हें विनियमित करने का अधिकार मिल गया। हालांकि, बुश प्रशासन ने इस फैसले को लागू करने के लिए ईपीए पर जोर नहीं डाला। खतरे संबंधी निष्कर्षों का जलवायु कार्रवाई में कैसे उपयोग हुआ?

बराक ओबामा ने चुनाव अभियान के दौरान जलवायु परिवर्तन पर ठोस कार्रवाई का वादा किया था। सत्ता संभालने के बाद उन्हें सीनेट में कड़ा विरोध झेलना पड़ा। उत्सर्जन व्यापार विधेयक पारित कराने के उनके प्रयास विफल हो गए। निष्कर्षों ने उन्हें अपनी कार्यकारी शक्तियों का उपयोग करते हुए पर्यावरण संरक्षण एजेंसी को उत्सर्जन को नियंत्रित करने का निर्देश देने की अनुमति दी। अपने पहले कार्यकाल में, ईपीए ने कारों और हल्के ट्रकों के लिए नए वाहन उत्सर्जन नियम जारी किए, साथ ही कुछ बिजली संयंत्रों और रिफाइनरियों के लिए भी नए मानक लागू किए। दूसरे कार्यकाल में ओबामा ने इन नियमों का विस्तार करते हुए उन्हें सभी बिजली संयंत्रों पर लागू कर दिया।

ये कदम अमेरिका द्वारा उत्सर्जन में कटौती की दिशा में उठाए गए पहले महत्वपूर्ण प्रयासों का प्रतिनिधित्व करते थे। इन पहलों से 2015 में पेरिस समझौते के लिए हुई वार्ताओं में ओबामा की कूटनीतिक विश्वसनीयता मजबूत हुई। इससे स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में चीन के साथ द्विपक्षीय सहयोग के लिए आधार तैयार हुआ। अंतिम चरण की वार्ताओं में दोनों देशों के प्रमुख वार्ताकारों ने मिलकर काम किया, ताकि पेरिस समझौते को अंतिम रूप दिया जा सके और उसे सफलतापूर्वक पारित कराया जा सके। ट्रंप ने इसे क्यों पलट दिया? 12 फरवरी को ट्रंप ने घोषणा की कि ईपीए उस कानूनी निष्कर्ष को रद्द करेगा, जिस पर वह लगभग 20 वर्षों से निर्भर रहा है।

अमेरिकी अर्थव्यवस्था को 'डी-कार्बोनाइज' करने (कार्बन उत्सर्जन घटाने) के प्रयासों पर ट्रंप द्वारा किए गए तमाम प्रहारों में यह सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है। ट्रंप का दावा है कि यह कानूनी निष्कर्ष अमेरिकी नागरिकों के हितों को नुकसान पहुंचाता है। वहीं, ट्रंप द्वारा नियुक्त ईपीए प्रमुख ली जेलडिन ने इस नियम को अहम करार दिया।

Advertisement
×