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UNGA में फिर गूंजा भारत-पाकिस्तान युद्ध का जिक्र, ट्रंप ने दोहराया ‘मैंने रुकवाया था युद्ध’ का दावा

ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकवाने का फिर से किया दावा

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की फाइल फोटो। एएनआई
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UNGA 2026 : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) में विश्व भर के नेताओं को संबोधित करते हुए एक बार फिर से यह दावा किया कि उन्होंने पिछले साल भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध को रुकवाया था।

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र की आम चर्चा में अपने संबोधन में ट्रंप ने कहा कि जब से मैंने पद संभाला है, आठ युद्ध को खत्म कराना मेरे लिए बहुत सम्मान की बात रही है। ऐसा करते हुए उन देशों में से कई के नेताओं के साथ दोस्ताना संबंध बना। मेरे लिए यह काफी सम्मान की बात है। इनमें से कई युद्ध तो कई वर्षों और दशकों तक चले थे। वह ये ''समझौते'' (युद्ध खत्म करने के) इसलिए करा पाए क्योंकि उन्होंने अपने ''बहुत खास रिश्तों'', व्यापार, शुल्क (टैरिफ) के इस्तेमाल और धमकी, तथा देशवार कई अन्य उपायों का सहारा लिया। इनमें समझौते की शर्तें शामिल हैं - कंबोडिया और थाईलैंड, कोसोवो और सर्बिया, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और रवांडा, पाकिस्तान और भारत, आर्मेनिया और अजरबैजान, और बेशक गाजा युद्ध भी, जिसमें, जैसा कि मैंने पहले कहा था, सभी बंधकों की वापसी शामिल है -- चाहे वे जीवित हों या मृत।

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उन्होंने कहा कि इन सभी देशों ने उन्हें ''धन्यवाद पत्र'' लिखा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री, जो बहुत अच्छे इंसान हैं, का कहना है कि 3 करोड़ लोगों और शायद उससे भी कहीं ज़्यादा लोगों की जान बचाने का श्रेय डोनाल्ड ट्रंप को जाता है। ट्रंप ने अजरबैजान, आर्मेनिया और कंबोडिया के नेताओं की तारीफ भरी बातों का भी जिक्र किया और कहा कि उन्होंने अपने-अपने देशों में संघर्ष खत्म कराने के लिए उनका आभार जताया।

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ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच टकराव को रोकने का श्रेय लेने की बार-बार कोशिश की है। उन्होंने यह बात पिछले साल 10 मई से कई बार दोहराई है, जब उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा था कि वॉशिंगटन की मध्यस्थता में हुई बातचीत के बाद भारत और पाकिस्तान ''पूरी तरह और तुरंत'' संघर्षविराम के लिए सहमत हुए। हालांकि, भारत लगातार यह कहता रहा है कि पाकिस्तान के साथ संघर्ष रोकने की सहमति दोनों देशों की सेनाओं के सैन्य संचालन महानिदेशकों (डीजीएमओ) के बीच सीधी बातचीत के बाद बनी थी। भारत ने किसी भी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप से इनकार किया है।

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