पंजाब सरकार की सुप्रीम कोर्ट में दलील- केंद्र के बराबर वेतन देने को तैयार
डीए मुद्दे पर खटखटाया शीर्ष अदालत का दरवाजा, कहा- कुछ मामलों में पहले से ही अधिक है तनख्वाह
पंजाब सरकार ने महंगाई भत्ते (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह केंद्रीय कर्मचारियों के बराबर वेतन देने के लिए तैयार है। राज्य ने दलील दी कि महंगाई भत्ते का निर्धारण केवल केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लागू प्रतिशत से आंख मूंदकर मिलान करने के बजाय समग्र वेतन पैकेज को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
राज्य सरकार ने टेक-होम (हाथ में आने वाले) वेतन में समानता के लिए आवश्यक सीमा तक डीए बढ़ाने की पेशकश की है। कोर्ट के समक्ष रखे गए तुलनात्मक आंकड़ों के मुताबिक मौजूदा 42 फीसदी डीए पर पंजाब के कर्मचारी पहले से ही सात प्रतिनिधि श्रेणियों में से पांच में अपने केंद्रीय समकक्षों की तुलना में अधिक वेतन ले रहे हैं। इसके लिए कुछ आंकड़े दिए गए। मसलन- पंजाब में क्लर्क का मूल वेतन 38,600 है। 42 फीसदी डीए के बाद हुआ 54,812 रुपये। उधर, 60 प्रतिशत डीए पर संबंधित केंद्र सरकार की श्रेणी के लिए यह राशि 36,960 रुपये है। इसी तरह स्टेनोग्राफर, शिक्षक एवं कांस्टेबल का भी तुलनात्मक विवरण दिया गया।
पंजाब सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि डीए की गणना मूल वेतन के प्रतिशत के रूप में की जाती है, इसलिए पंजाब के उच्च मूल वेतन के आधार पर उच्च केंद्रीय प्रतिशत लागू करने से वास्तविक समानता के बजाय कुल वेतन काफी अधिक हो सकता है। राज्य ने बताया है कि कई प्रमुख काडरों में पंजाब का वेतन ढांचा पहले से ही काफी अधिक है। सरकार की ओर से कहा गया कि डीए को पूरी तरह से केंद्रीय दर के अनुरूप करने से हर साल लगभग 6,500 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट के उस निर्देश को चुनौती दी है जिसमें राज्य के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को पंजाब में सेवारत अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों पर लागू दरों पर लंबित डीए/डीआर किश्तों का भुगतान करने की आवश्यकता है।
बकाये से नहीं किया है इनकार
राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि बकाये से इनकार नहीं किया गया है। राज्य ने स्वीकृत देनदारी को चरणों में चुकाने के लिए एक योजना तैयार की है। हाईकोर्ट के आदेश के संदर्भ में पंजाब सरकार ने इस पर भी सवाल उठाया है कि क्या कोई अदालत खुद डीए के भुगतान की दर, समय और तरीके का निर्धारण कर सकती है। पंजाब सरकार ने दोहराया है कि वह उसे रोकने की कोशिश नहीं कर रही है जो स्वीकार्य रूप से देय है।

