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Pakistan Mediation : अमेरिका-ईरान-इजरायल युद्ध के बीच पाकिस्तान बना मध्यस्थ, जनरल असीम मुनीर ने ट्रंप से की बात

Pakistan Mediation : पश्चिम एशिया में अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच जारी भीषण संघर्ष को समाप्त करने के लिए पाकिस्तान ने अब एक प्रमुख मध्यस्थ (Mediator) के रूप में कदम आगे बढ़ाए हैं। ब्रिटेन के प्रतिष्ठित अखबार 'फाइनेंशियल टाइम्स'...

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Pakistan Mediation : पश्चिम एशिया में अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच जारी भीषण संघर्ष को समाप्त करने के लिए पाकिस्तान ने अब एक प्रमुख मध्यस्थ (Mediator) के रूप में कदम आगे बढ़ाए हैं। ब्रिटेन के प्रतिष्ठित अखबार 'फाइनेंशियल टाइम्स' (FT) की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से इस मुद्दे पर सीधी बातचीत की है। इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में जारी तनाव को कम करना और युद्धविराम के लिए रास्ता तैयार करना है।

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इस्लामाबाद में हो सकती है अहम बैठक

रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान केवल संदेशवाहक की भूमिका ही नहीं निभा रहा, बल्कि उसने इस्लामाबाद को शांति वार्ता के स्थल के रूप में भी प्रस्तावित किया है। सूत्रों का दावा है कि इस सप्ताह के अंत तक इस्लामाबाद में ट्रंप प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों और ईरानी प्रतिनिधियों के बीच उच्च स्तरीय बैठक हो सकती है। इसमें अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जारेड कुशनर के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।

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पाकिस्तान की इस पहल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता से लिया जा रहा है, क्योंकि उसके ईरान के साथ गहरे सांस्कृतिक संबंधों के साथ-साथ वर्तमान अमेरिकी नेतृत्व के साथ भी अच्छे कामकाजी रिश्ते हैं।

बैक-चैनल डिप्लोमेसी और क्षेत्रीय सहयोग

पाकिस्तान अकेले इस मिशन पर नहीं है; वह तुर्किये और मिस्र के साथ मिलकर 'बैक-चैनल डिप्लोमेसी' के जरिए वाशिंगटन और तेहरान के बीच की खाई को पाटने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से फोन पर विस्तार से चर्चा की है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की तटस्थ स्थिति जैसे कि उसकी धरती पर कोई अमेरिकी सैन्य अड्डा न होना और युद्ध में सीधे शामिल न होना उसे एक विश्वसनीय मध्यस्थ बनाती है। युद्ध अब अपने चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार और क्षेत्रीय स्थिरता पर गहरा असर पड़ा है।

ईरान का रुख और व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया

ईरान ने फिलहाल अमेरिका के साथ किसी भी सीधी बातचीत से इनकार किया है, लेकिन यह स्वीकार किया है कि उसे मध्यस्थ देशों के माध्यम से संदेश प्राप्त हुए हैं। दूसरी ओर, व्हाइट हाउस ने इन चर्चाओं पर टिप्पणी करने से परहेज किया है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि ये अत्यंत संवेदनशील कूटनीतिक चर्चाएं हैं और अमेरिका मीडिया के माध्यम से कोई समझौता या बातचीत नहीं करेगा।

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