Lohri Special : लोहड़ी की रात ये गलतियां न करें, वरना रूठ सकते हैं अग्नि देव
लोहड़ी की पवित्र अग्नि में ये चीजें डालना माना जाता है अशुभ
Lohri Special : उत्तर भारत में आज लोहड़ी का त्योहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जा रहा है। यह पर्व खासतौर पर पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू–कश्मीर और दिल्ली में सेलिब्रेट किया जाता है। यह पर्व सूर्य के उत्तरायण, सर्दियों की विदाई और नई फसल के स्वागत के अवसर पर मनाया जाता है। इस दिन लोग अग्नि जलाकर उसमें तिल, गुड़, मूंगफली आदि अर्पित करते हैं और उसकी परिक्रमा करते हैं।
हालांकि लोक-मान्यताओं में कुछ ऐसे काम भी बताए गए हैं, जिन्हें लोहड़ी की रात करने की मनाही होती है और आज हम आपको उसी के बारे में बताएंगे।
खाली पेट नहीं रहना चाहिए
ऐसी मान्यता है कि लोहड़ी की रात किसी भी व्यक्ति को खाली पेट नहीं रहना चाहिए। इस दिन तिल-गुड़, रेवड़ी या घर का बना भोजन जरूर खाएं।
मांस-मदिरा से दूरी
लोहड़ी का त्योहार बेहद पवित्र माना गया है इसलिए इस मौके पर मांसाहार और शराब से दूर रहना चाहिए। माना जाता है कि ऐसा करना पवित्र अग्नि और धार्मिक भावनाओं का अपमान है, जिससे पुण्य कम होता है।
उधार देना या लेना नहीं चाहिए
पुरानी मान्यताओं के अनुसार, लोहड़ी की रात उधार देने या लेने से पूरे साल धन की तंगी बनी रहती है। यह दिन आर्थिक लेन-देन से बचकर दान करने का माना गया है।
घर में झाड़ू नहीं लगानी चाहिए
मान्यता है कि इस रात झाड़ू लगाने से लक्ष्मी का अपमान होता है और समृद्धि बाहर चली जाती है। ऐसे में लोहड़ी के दौरान रात को झाड़ू लगाना या साफ-सफाई का काम नहीं करना चाहिए।
सूर्य और अग्नि की उपेक्षा ना करें
लोहड़ी सूर्य और अग्नि से जुड़ा पर्व है इसलिए रात के समय अग्नि के प्रति अनादर- जैसे पैर रखना, पीठ करके बैठना अशुभ माना जाता है। कहा जाता है कि इससे देवता नाराजगी हो जाते हैं।
रोना या शोक व्यक्त करना
लोक-मान्यता है कि लोहड़ी की रात रोने से पूरे साल दुख और परेशानी बनी रहती है। इस दिन प्रसन्न रहना और दूसरों को भी खुशी देना शुभ माना जाता है।
अग्नि में अपवित्र वस्तुएं डालना
पवित्र अग्नि में केवल तिल, गुड़, मूंगफली, रेवड़ी जैसी चीजें ही डालनी चाहिए। इसमें कचरा, प्लास्टिक, मूंगफली के छिलके आदि डालना अग्नि का अपमान समझा जाता है।
पानी ना डालेंं
बहुत से लोग लोहड़ी सेलिब्रेट करने के बाद आग में पानी डालकर बूझाते हैं लेकिन ऐसा करना देवी-देवताओं का अपमान समझा जाता है। ऐसे में पूजा समाप्त हो जाने के बाद अग्नि को पानी से ना बुझाएं बल्कि उसे अलग रख दें। वह खुद कही धीरे-धीरे बुझ जाएगी।

