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Middle East Crisis : इजराइल ने ईरान के गैस क्षेत्रों पर हमले रोकने का किया वादा, ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल

ट्रम्प के अनुरोध पर नेतन्याहू ने लिया फैसला, खाड़ी क्षेत्र में हमलों से कच्चे तेल के दामों में 60 फीसदी का भारी उछाल

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Middle East Crisis :  इजराइल ने ईरान के प्रमुख प्राकृतिक गैस क्षेत्रों पर आगे कोई हमला नहीं करने का वादा किया है। यह अहम फैसला ऐसे समय में आया है जब ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में तेल और प्राकृतिक गैस प्रतिष्ठानों पर अपने हमले तेज कर दिए हैं। इस बढ़ते संघर्ष का वैश्विक ऊर्जा बाजारों और अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ रहा है।

इन हमलों के बाद ईंधन की कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई है और ईरान के पड़ोसी अरब देशों के युद्ध में सीधे तौर पर उतरने का खतरा बढ़ गया है। दुनिया के कुल तेल परिवहन का पांचवां हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। इस अहम जलमार्ग पर ईरान की लगातार रुकावटों के कारण वैश्विक ईंधन आपूर्ति पहले से ही भारी दबाव में है।

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ट्रम्प की अपील और नेतन्याहू का दावा

ईरान के साउथ पार्स गैस क्षेत्र पर इजराइल के हमले के जवाब में ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की थी। इसके बाद इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बृहस्पतिवार देर रात बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के अनुरोध पर इजराइल फिलहाल अपतटीय गैस क्षेत्र पर कोई हमला नहीं करेगा। नेतन्याहू ने टेलीविजन पर प्रसारित अपने संबोधन में दावा किया कि अब ईरान के पास यूरेनियम संवर्धन या बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की क्षमता नहीं बची है, हालांकि उन्होंने इस दावे के समर्थन में कोई प्रमाण पेश नहीं किया।

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मुजतबा खामेनेई के हाथ में कमान, कच्चे तेल में लगी आग

अमेरिका और इजराइल द्वारा 28 फरवरी को युद्ध शुरू किए जाने के बाद से ईरान के कई शीर्ष नेता हवाई हमलों में मारे जा चुके हैं, जिससे देश की सैन्य क्षमताएं कमजोर हुई हैं। सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के मारे जाने के बाद अब ईरान का नेतृत्व उनके बेटे मुजतबा खामेनेई कर रहे हैं। ईरान अभी भी खाड़ी के अरब पड़ोसी देशों को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहा है।

तनाव के चलते यूएई के तट के पास एक जहाज में आग लगा दी गई और कतर के पास एक अन्य जहाज क्षतिग्रस्त हो गया। इसके अलावा लाल सागर में स्थित सऊदी अरब की एक रिफाइनरी को भी ईरानी ड्रोन से निशाना बनाया गया। 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमत 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। तेल के अंतरराष्ट्रीय मानक 'ब्रेंट क्रूड' की कीमत में भी अब तक 60 प्रतिशत से अधिक का उछाल आ चुका है।

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