Hormuz Monitoring : होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए ईरान-ओमान का नया प्रस्ताव, निगरानी बढ़ाने का किया दावा
Hormuz Monitoring : ईरान ने दावा किया है कि वह पड़ोसी देश ओमान के साथ मिलकर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) की निगरानी के लिए एक संयुक्त प्रस्ताव तैयार कर रहा है। ईरानी राजनयिक काजिम...
Hormuz Monitoring : ईरान ने दावा किया है कि वह पड़ोसी देश ओमान के साथ मिलकर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) की निगरानी के लिए एक संयुक्त प्रस्ताव तैयार कर रहा है। ईरानी राजनयिक काजिम घारीबबादी के हवाले से आई खबरों में कहा गया है कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग को जहाजों के आवागमन के लिए सुरक्षित और सुगम बनाना है।
सरकारी समाचार एजेंसी 'आईआरएनए' के मुताबिक, घारीबबादी ने बृहस्पतिवार को इस प्रस्ताव का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इससे जहाजों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। हालांकि, इस प्रस्ताव के मसौदे में किन तकनीकी पहलुओं को शामिल किया गया है और इसके वैश्विक प्रभाव क्या होंगे, इस पर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। दूसरी ओर, ओमान ने भी इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
तनाव के बीच निगरानी बढ़ाने की कोशिश
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब इस क्षेत्र में जहाजों पर हमलों की घटनाओं ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। पिछले कुछ समय में ईरान पर जहाजों को निशाना बनाने और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के एवज में कथित तौर पर 20 लाख अमेरिकी डॉलर तक की मांग करने के आरोप लगे हैं। इन गतिविधियों की वजह से यह मार्ग एक तरह से अवरुद्ध हो गया है, जिसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल की आपूर्ति पर पड़ रहा है।
शांतिकाल के नियम और युद्ध की स्थिति
राजनयिक घारीबबादी ने स्पष्ट किया कि जब आक्रामक कार्रवाइयों का सामना करना पड़ता है, तो उसका सीधा असर नौवहन (Navigation) पर पड़ता है। उन्होंने कहा, "हम इस समय युद्ध जैसी स्थिति में हैं और ऐसी परिस्थितियों में यह उम्मीद करना सही नहीं है कि शांतिकाल के नियम लागू हों।"
बता दें कि भौगोलिक रूप से यह जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के जलक्षेत्र के अंतर्गत आता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत इसे स्वतंत्र समुद्री मार्ग माना जाता है। यहां से जहाजों का बिना किसी बाधा के गुजरना अनिवार्य है। अब इस नए प्रस्ताव से इस मार्ग की स्वायत्तता और सुरक्षा पर क्या असर पड़ेगा, इस पर दुनिया भर के देशों की नजर बनी हुई है।

