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Iran Israel Conflict: ईरान में अमेरिका-इस्राइल के हमले तेज, ट्रंप ने बातचीत के संकेत दिए

Iran Israel Conflict: ईरान ने बदले का संकल्प लेते हुए जवाबी कार्रवाई में इस्राइल और अरब देशों पर मिसाइलें दागीं

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अमेरिका और इस्राइल द्वारा किए गए हमलों के बाद ईरान द्वारा मिसाइलों से किए गए हमलों के बाद, इस्राइल के बेत शेमेश में हुए घातक ईरानी हमले के दृश्य का ड्रोन से लिया गया दृश्य। रॉयटर्स
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Iran Israel Conflict:  ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद अमेरिका-इस्राइल ने रविवार को ईरान में कई जगहों पर जोरदार हमले किए तथा बैलिस्टिक मिसाइल ठिकानों पर बम गिराए और युद्धपोत भी तबाह कर दिए।

इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को संकेत दिया कि वह ईरान के नए नेतृत्व से बातचीत के लिए तैयार हैं। उन्होंने पत्रिका 'द अटलांटिक' से कहा, "वे बात करना चाहते हैं, मैंने बातचीत के लिए सहमति दे दी है, इसलिए मैं उनसे बात करूंगा।"

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हालांकि, इससे एक दिन पहले ट्रंप ने ईरान के लोगों से सरकार अपने "हाथ में लेने" का आह्वान किया था। ईरानी नेताओं के मुताबिक, इन हमलों की शुरुआत से अब तक खामेनेई और अन्य वरिष्ठ नेताओं के अलावा 200 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। ईरान ने बदले का संकल्प लेते हुए जवाबी कार्रवाई में इस्राइल और अरब देशों पर मिसाइलें दागीं।

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इस्राइल की बचाव सेवाओं के अनुसार, यरुशलम और मध्य शहर बेत शेमेश के एक प्रार्थना स्थल (सिनागॉग) समेत कई जगहों पर हमले हुए। बेत शेमेश में नौ लोगों की मौत हुई और 28 लोग घायल हुए। इसके साथ ही इस्राइल में मृतकों की कुल संख्या 11 हो गई। पुलिस ने बताया कि हमले के बाद 11 लोग अब भी लापता हैं। लेकिन ईरान पर हमले थमते नजर नहीं आ रहे हैं।

अमेरिका और इस्राइल ने ईरान के महत्वपूर्ण सैन्य, राजनीतिक और खुफिया ठिकानों को निशाना बनाया। इससे प्रतीत होता है कि जंग व्यापक होती जा रही है और यह लंबे समय तक चल सकती है, जो पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता ला सकती है। अमेरिकी सेना ने रविवार को कहा कि ईरान पर अमेरिका के हमलों के दौरान उसके तीन सैनिक मारे गए और पांच अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। यह पहली बार है जब इस बड़े सैन्य अभियान में अमेरिका की ओर से उसके सैनिकों के मारे जाने की पुष्टि हुई है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किए एक वीडियो में कहा कि अमेरिका अपने सैनिकों की मौत का "बदला" लेगा और संघर्ष खत्म होने से पहले "संभव है कि और भी अमेरिकी सैनिक मारे जाएं।"

इस्राइल के ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफ्रिन ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि 100 लड़ाकू विमानों ने एक साथ तेहरान में कई ठिकानों पर हमला किया। उन्होंने कहा कि इन हमलों में ईरान की वायुसेना की इमारतों, मिसाइल कमान से जुड़े ठिकानों और आंतरिक सुरक्षा बल की इमारतों को निशाना बनाया गया।

अमेरिका की सेना ने कहा कि 'बी-टू स्टेल्थ' विमानों ने लगभग 900 किलोग्राम वजनी बमों से ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल ठिकानों पर हमला किया। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि ईरान के नौ युद्धपोत डुबो दिए गए हैं और ईरानी नौसेना का मुख्यालय "काफी हद तक नष्ट" हो गया है।

यूरोप अब तक इस युद्ध से दूर रहा है और कूटनीतिक हल पर बल देता रहा है। लेकिन संघर्ष की लपटें दूसरे देशों तक भी पहुंचने के संकेतों के बीच, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने रविवार को कहा कि वे ईरान के हमलों को रोकने में मदद के लिए अमेरिका का साथ देंगे। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केअर स्टॉर्मर ने कहा कि ब्रिटेन, अमेरिका को अपने सैन्य अड्डों का इस्तेमाल करके ईरान के मिसाइल ठिकानों पर हमला करने की अनुमति देगा।

सीसीएस ने पश्चिम एशिया की स्थिति की समीक्षा की

सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीएस) ने पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति की समीक्षा की और क्षेत्र में रहने वाले बड़े भारतीय प्रवासी समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की। सीसीएस ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश भी दिया है कि वे घटनाक्रम से प्रभावित भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए आवश्यक एवं व्यवहार्य कदम उठाएं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में रविवार रात हुई बैठक में सीसीएस ने संघर्ष की स्थिति को शीघ्र समाप्त करने और संवाद एवं कूटनीति के जरिए मामले का हल निकालने के महत्व पर भी जोर दिया। सीसीएस देश के सुरक्षा संबंधी और रणनीतिक मामलों पर निर्णय लेने वाला सर्वोच्च निकाय है।

एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि सीसीएस ने पश्चिम एशिया में उत्पन्न हो रही स्थिति की समीक्षा करने के लिए बैठक की और उसे ईरान में हुए हवाई हमलों और उसके बाद कई खाड़ी देशों में हुए हमलों सहित बढ़ते तनाव के बारे में जानकारी दी गई।

बयान में कहा गया है, ''उसने क्षेत्र में रहने वाले बड़े भारतीय प्रवासी समुदाय की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है।'' सीसीएस ने पश्चिम एशिया से होकर गुजरने वाले भारतीय यात्रियों और निर्धारित परीक्षाओं में शामिल हो रहे छात्रों के सामने आने वाली कठिनाइयों के साथ-साथ क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक एवं वाणिज्यिक गतिविधियों पर पड़ने वाले व्यापक प्रभावों की भी समीक्षा की।

बयान के अनुसार, ''सीसीएस ने सभी संबंधित विभागों को घटनाक्रम से प्रभावित भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए आवश्यक और व्यवहार्य कदम उठाने का निर्देश दिया। उसने संघर्ष की स्थिति को शीघ्र समाप्त करने और संवाद एवं कूटनीति की ओर लौटने के महत्व पर बल दिया।''

ईरान पर अमेरिका और इस्राइल द्वारा किए गए हमले और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने के बाद उत्पन्न हुई स्थिति का जायजा लेने के लिए सीसीएस की बैठक बुलाई गई थी। ईरान ने इस हमले का जवाब देते हुए खाड़ी क्षेत्र में स्थित इस्राइल और अमेरिकी सैन्य ठिकानों के साथ-साथ वैश्विक व्यापार केंद्र दुबई पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस जयशंकर और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बैठक में उपस्थित थे। सीसीएस की बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी के मिश्रा और शक्तिकांत दास, प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान, कैबिनेट सचिव टी वी सोमनाथन और विदेश सचिव विक्रम मिसरी भी उपस्थित थे।

ईरान में लगभग 10,000 भारतीय नागरिक रहते, पढ़ते और काम करते हैं, जबकि इस्राइल में 40,000 से अधिक भारतीय नागरिक रहते हैं। खाड़ी देशों और पश्चिम एशिया में रहने वाले भारतीयों की संख्या लगभग 90 लाख है। वर्तमान में पश्चिम एशिया का हवाई क्षेत्र लगभग बंद है।

पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव बढ़ने के कारण उड़ान सेवाएं बाधित होने से सैकड़ों भारतीय दुबई, दोहा और अन्य प्रमुख हवाई अड्डों पर फंसे हुए हैं, जिनमें से कई लोग सहायता के लिए सोशल मीडिया पर भारत सरकार से अपील कर रहे हैं। भारत ने अतीत में संघर्षों के बीच पश्चिम एशिया सहित दुनिया के विभिन्न हिस्सों से हजारों भारतीयों को सफलतापूर्वक निकाला है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पूरे क्षेत्र में भारतीय दूतावास अपने नागरिकों के साथ लगातार संपर्क में है और हेल्पलाइन सक्रिय कर दी गई हैं।

इराकी शिया मिलिशिया ने बगदाद में अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाते हुए ड्रोन हमले का दावा किया

इराक की एक शिया मिलिशिया ने सोमवार को दावा किया कि उसने राजधानी बगदाद के हवाई अड्डे पर तैनात अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाकर ड्रोन हमला किया। यह हमला ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद की जा रही जवाबी कार्रवाई के दायरे को और बढ़ाता दिखाई देता है।

'सराया अवलिया अल-दम' नामक यह समूह उन शिया मिलिशिया संगठनों में से एक है जो 2003 में अमेरिका के नेतृत्व में हुए आक्रमण के बाद इराक में सक्रिय हुए थे। उस आक्रमण में इराक के तत्कालीन राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन की सरकार गिरा दी गई थी।

इस दावे पर अमेरिका और इराक की ओर से तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की गई है। यह हमला ऐसे समय हुआ है जब लेबनानी समूह हिजबुल्ला सहित ईरान समर्थित मिलिशिया समूह उस संघर्ष में शामिल हो गए हैं जो अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरान की इस्लामी सरकार को निशाना बनाकर किए गए हवाई हमलों के बाद शुरू हुआ।

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