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India-US trade deal : ट्रंप के दावे पर क्रेमलिन की दो टूक- भारत से तेल खरीद रोकने के संबंध में नहीं मिला कोई संदेश

अलेक्जेंडर नोवाक ने कहा कि सरकार स्थिति पर बारीकी से नजर रख रही है

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India-US trade deal : रूस को तेल खरीद रोकने के संबंध में भारत से कोई संदेश नहीं मिला है। रूसी सत्ता के केंद्र 'क्रेमलिन' के प्रवक्ता दमित्री पेस्कोव ने मंगलवार को यह बात कही। उनकी यह टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे के एक दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ''रूस से तेल खरीदना बंद करने व अमेरिका तथा संभवतः वेनेजुएला से अधिक तेल खरीदने पर सहमत हो गए हैं। पेस्कोव ने कहा कि हमें नई दिल्ली से अभी तक कोई संदेश नहीं मिला है।

रूसी मीडिया की खबरों के अनुसार, 'क्रेमलिन' के प्रवक्ता ने यह भी कहा कि रूस हर संभव तरीके से भारत के साथ अपने संबंधों को मजबूत करना जारी रखने का इरादा रखता है। रूस के उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने कहा कि सरकार स्थिति पर बारीकी से नजर रख रही है। उन्होंने कहा कि रूस को भारत द्वारा रूसी तेल को अस्वीकार करने की संभावना के संबंध में केवल अमेरिका की ओर से सार्वजनिक बयान ही देखने को मिले हैं। मंत्रिमंडल में ऊर्जा विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे नोवाक ने कहा, ''अभी तो सिर्फ सार्वजनिक बयान ही सामने आए हैं।

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देखते हैं आगे क्या हालात बनते हैं। उन्होंने कहा कि रूस को भरोसा है कि उसके ऊर्जा संसाधनों की वैश्विक स्तर पर मांग बनी रहेगी, क्योंकि वे आपूर्ति और मांग के बीच संतुलन बनाए रखते हैं। नोवाक ने कहा कि कुल मिलाकर, हमारे ऊर्जा संसाधनों की मांग बनी हुई है। आपूर्ति हमेशा मांग के अनुरूप बनी रहेगी क्योंकि संतुलन कायम है। रूस के ऊर्जा मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि उन्हें भारतीय रिफाइनरी कंपनियों से अनुबंध रद्द करने के संबंध में कोई सूचना नहीं मिली है।

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सोमवार को मोदी के साथ फोन पर बातचीत के बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया पर घोषणा की कि भारत-अमेरिका एक व्यापार समझौते पर सहमत हुए हैं, जिसके तहत अमेरिका जवाबी शुल्क 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करेगा। पिछले साल ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाए थे, जो दुनिया में किसी भी देश पर सबसे ज्यादा शुल्क था। इनमें रूस से तेल खरीदने पर 25 प्रतिशत का शुल्क भी शामिल था।

भारत अपने कच्चे तेल का लगभग 88 प्रतिशत हिस्सा दूसरे देशों से खरीदता है, जिसे पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधनों में परिवर्तित किया जाता है। वर्ष 2021 तक भारत द्वारा आयात किए गए कुल कच्चे तेल में रूसी तेल का हिस्सा मुश्किल से 0.2 प्रतिशत था। विश्व का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश भारत, फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद पश्चिमी देशों द्वारा मॉस्को से दूरी बनाने के बाद रियायती रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया।

तेल आपूर्ति पर नजर रखने वाली कंपनी केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी के पहले तीन हफ्तों में भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात घटकर लगभग 11 लाख बैरल प्रति दिन रह गया, जबकि पिछले महीने यह औसतन 12.1 लाख बैरल प्रति दिन था और 2025 के मध्य में आयात 20 लाख बैरल प्रति दिन से अधिक होने का अनुमान था।

केप्लर के अनुसार, इराक अब रूस के लगभग बराबर मात्रा में आपूर्ति कर रहा है, जो दिसंबर 2025 में औसतन 9,04,000 बैरल प्रति दिन से ज्यादा है। सऊदी अरब से भी तेल का उत्पादन जनवरी में बढ़कर 9,24,000 बैरल प्रति दिन हो गया, जो दिसंबर में 7,10,000 बैरल प्रति दिन और अप्रैल 2025 में 5,39,000 बैरल प्रति दिन के निचले स्तर पर था।

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