Haryana Strike : 26 दिन से चल रही हड़ताल पर पहली बार सरकार ने तय की डेडलाइन, निगमों को वापसी सुनिश्चित करने के निर्देश*
ESMA का हवाला देकर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी; हाईकोर्ट के सफाई व्यवस्था संबंधी आदेश का भी जिक्र
Haryana Safai Karmchari : छह अगस्त से सफाई व्यवस्था छोड़कर आंदोलन कर रहे कर्मचारियों को हरियाणा सरकार ने अब पांच सितंबर तक ड्यूटी पर लौटने का अल्टीमेटम दिया है। इसके बाद गैरहाजिर रहने वाले कर्मचारियों पर कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी। शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने सभी नगर निगम आयुक्तों और जिला नगर आयुक्तों को दो दिन के भीतर हड़ताली कर्मचारियों की ड्यूटी पर वापसी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
सरकार ने सफाई कार्य को आवश्यक सेवा बताते हुए हरियाणा आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (एस्मा), 1974 के प्रावधानों का भी हवाला दिया है। सरकार की इस सख्ती के जवाब में सफाई कर्मचारियों ने पीछे हटने के बजाय आंदोलन का अगला चरण घोषित कर दिया है। शुक्रवार को प्रदेशभर में सामूहिक मुंडन कर विरोध जताया जाएगा और पांच-छह सितंबर को मंत्रियों के कैंप कार्यालयों पर प्रदर्शन होंगे। यानी पांच सितंबर की सरकारी डेडलाइन और उसी दिन से शुरू होने वाला कर्मचारियों का आंदोलन, दोनों आमने-सामने हैं।
सरकार ने निगमों को दी दो दिन की मोहलत
शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने नगर निगम आयुक्तों और जिला नगर आयुक्तों को भेजे निर्देशों में कहा है कि उनके अधिकार क्षेत्र में हड़ताल पर गए सभी सफाई कर्मचारियों और सीवरमैन की पांच सितंबर तक हर हाल में ड्यूटी पर उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। आदेश में हरियाणा नगरपालिका अधिनियम, 1973 की धारा 47 का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि सफाई व्यवस्था आवश्यक कार्य है। विभाग ने सफाई कार्य को हरियाणा आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम, 1974 यानी एस्मा के दायरे में भी बताया है। विभाग के अनुसार कर्मचारी बिना अनुमति और पूर्व सूचना के छह अगस्त से अनुपस्थित हैं। आदेश में यह आरोप भी लगाया गया है कि कुछ आंदोलनकारी दूसरे कर्मचारियों को काम करने से रोक रहे हैं और नगर निकायों के सफाई साधनों, उपकरणों तथा मशीनरी को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
13 में से 12 मांगें मानने का सरकार का दावा
सरकार का कहना है कि कर्मचारियों की 13 मांगों में से 12 पहले ही स्वीकार की जा चुकी हैं। इसके बावजूद हड़ताल जारी है। लंबे समय से सफाई व्यवस्था प्रभावित होने को सरकार ने गंभीर मामला बताया है। विभाग ने शहरी क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था प्रभावित होने से बीमारी फैलने के खतरे का भी हवाला दिया है। इस मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट 18 अगस्त को शहरी क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कानूनी तरीके से कार्रवाई करने का निर्देश दे चुका है। अब सरकार इसी पृष्ठभूमि में कर्मचारियों को काम पर लौटने के लिए अंतिम समय-सीमा दे रही है।
सरकारी कार्रवाई के जवाब में कर्मचारियों ने बढ़ाया मोर्चा
कर्मचारी संगठनों ने सरकार के अल्टीमेटम को आंदोलन खत्म करने का संकेत नहीं माना है। नगरपालिका कर्मचारी संघ के राज्य प्रधान नरेश कुमार शास्त्री ने आरोप लगाया कि हड़ताल तोड़ने के लिए कर्मचारियों को कानूनी कार्रवाई के नोटिस भेजे जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि 31 अगस्त को अग्निशमन विभाग के 10 अनुबंधित कर्मचारी नेताओं को बर्खास्त और 14 नियमित कर्मचारियों को निलंबित किया गया। उनके अनुसार 500 से अधिक सफाई एवं अग्निशमन कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं। सोनीपत के 15 कर्मचारियों सहित राज्य कमेटी के नेता राजाभाई को जेल भेजे जाने का भी उन्होंने दावा किया। शास्त्री ने कहा कि कार्रवाई से आंदोलन कमजोर नहीं होगा। शुक्रवार को सामूहिक मुंडन और पांच-छह सितंबर को मंत्रियों के कैंप कार्यालयों पर प्रदर्शन इसी रणनीति का हिस्सा हैं।
अब आंदोलन जिला पंचायतों से कुरुक्षेत्र तक जाएगा
कर्मचारियों ने आंदोलन को आगे बढ़ाने का भी कार्यक्रम घोषित कर दिया है। 10 से 12 सितंबर तक प्रदेश के सभी जिलों में जन न्याय पंचायतें होंगी। इसके बाद 13 सितंबर को कुरुक्षेत्र में राज्य स्तरीय जन न्याय पंचायत आयोजित की जाएगी। इस तरह हड़ताल अब केवल नगर निकायों की सफाई व्यवस्था तक सीमित नहीं रही। सरकार ने जहां पांच सितंबर को ड्यूटी पर वापसी की समय-सीमा तय कर कार्रवाई का संकेत दिया है, वहीं कर्मचारी उसी समय आंदोलन को मंत्रियों के कैंप कार्यालयों और फिर जिलों तक ले जाने की तैयारी में हैं। अगले दो दिन इस टकराव की दिशा तय करेंगे।

