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Haryana News : दंगल से ज्यादा चर्चा ‘दांव’ की : गोंडा में कुश्ती कम, जुबानी जंग ज्यादा

विनेश की शायरी, बृजभूषण का पलटवार और हरियाणा के पहलवानों का दबदबा

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गोंडा में शुरू हुए नेशनल ओपन रैंकिंग कुश्ती टूर्नामेंट ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारतीय कुश्ती में मुकाबले सिर्फ अखाड़े तक सीमित नहीं। दांव-पेच अब सोशल मीडिया पर भी खेले जा रहे हैं। एक तरफ ओलंपियन और कांग्रेस विधायक विनेश फोगाट की भावुक शायरी चर्चा में रही, तो दूसरी तरफ पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के तंज ने इस विवाद को और हवा दे दी।

गोंडा में 10 से 12 मई तक चल रहे नेशनल ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट में लगभग 1400 पहलवान उतरे हैं। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा उस नाम की है जो अखाड़े में मौजूद नहीं है। वह है विनेश फोगाट। भारतीय कुश्ती महासंघ द्वारा नियम उल्लंघन के चलते उन पर आगामी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने पर रोक लगाए जाने के बाद उन्हें इस प्रतियोगिता में एंट्री नहीं मिली।

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टूर्नामेंट से बाहर रहने के बाद विनेश ने सोशल मीडिया पर लिखा - 'जिंदगी फंसी है किसी मझधार में, जमाना ढूंढता है खामी मेरे किरदार में…।' इस पोस्ट को खेल से ज्यादा राजनीति और व्यक्तिगत संघर्ष से जोड़कर देखा गया। कुछ ही देर में इसका जवाब भी उसी अंदाज में आया। बृजभूषण शरण सिंह ने लिखा - 'शोहरत की बुलंदी पल भर का तमाशा है, जिस शाख पे बैठे हो, वो टूट भी सकती है।' नेताओं-पहलवानों के इन संदेशों ने कुश्ती के दंगल को सियासी रंग दे दिया। सोशल मीडिया पर समर्थक भी दो खेमों में बंट गए।

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विवादों के बीच सबसे बड़ी तस्वीर यह है कि भारतीय कुश्ती का असली केंद्र आज भी हरियाणा ही है। गोंडा में उतरे 1400 पहलवानों में से करीब 800 हरियाणा के हैं। यानी हर दूसरा नहीं, लगभग हर पहला बड़ा दावेदार हरियाणा से है। यह आंकड़ा सिर्फ भागीदारी तक सीमित नहीं है। पिछले वर्षों के नतीजों पर नजर डालें तो राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में 60 से 70 प्रतिशत तक मेडल हरियाणा के पहलवानों के हिस्से आते रहे हैं।

दरअसल, नेशनल ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट भारतीय कुश्ती में बेहद अहम माना जाता है। यहीं से नेशनल कैंप और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए रास्ता तय होता है। ऐसे में हर पहलवान के लिए यह प्रतियोगिता करियर का बड़ा पड़ाव होती है।

वापसी की जंग, भविष्य की तैयारी भी

गोंडा का यह टूर्नामेंट सिर्फ नये खिलाड़ियों का मंच नहीं, बल्कि उन स्टार पहलवानों की वापसी की जंग भी है, जो रैंकिंग में पिछड़ चुके हैं। विश्व चैंपियनशिप और एशियन गेम्स में पदक जीत चुके दीपक पुनिया जैसे पहलवान भी यहां अपनी स्थिति मजबूत करने उतरे हैं। उनका मुकाबला युवा पहलवान अनिरुद्ध कुमार जैसे खिलाड़ियों से है, जिन्होंने एशियन स्तर पर भारत को पदक दिलाया है। यही वजह है कि इस प्रतियोगिता को भारतीय कुश्ती का सबसे कठिन घरेलू मंच माना जाता है।

डोपिंग का साया भी

टूर्नामेंट के दौरान भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष संजय सिंह ने यह स्वीकार किया कि भारतीय कुश्ती में डोपिंग अभी भी गंभीर चुनौती बनी हुई है। प्रतियोगिता स्थल के आसपास इस्तेमाल की गई सिरिंज मिलने से महासंघ की चिंता बढ़ी है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि हरियाणा के खिलाड़ियों की भारी भागीदारी यह साबित करती है कि महासंघ किसी राज्य विशेष के खिलाफ पक्षपात नहीं कर रहा।

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