‘जिसका खेत, उसकी रेत’ पर तकरार, विधायक पूजा ने उठाई मांग, सरकार ने गिनाए डी-सिल्टिंग के आंकड़े
30 जून से पहले टांगरी-मारकंडा में बड़े पैमाने पर गाद निकासी की तैयारी
हरियाणा विधानसभा में नदियों से रेत और गाद निकासी को लेकर नई बहस छिड़ गई। मुलाना की विधायक पूजा चौधरी ने ‘जिसका खेत-उसकी रेत’ मॉडल लागू करने की मांग उठाते हुए कहा कि वर्तमान व्यवस्था में खुदाई केवल पंचायती भूमि पर हो रही है, जबकि नदियां कई जगह निजी जमीन से होकर गुजरती हैं। इससे किसानों और सरकार दोनों को अरबों रुपये का नुकसान हो रहा है।
उन्होंने कहा कि अम्बाला जिला हर साल बाढ़ और कटाव से प्रभावित होता है। यदि निजी भूमि पर बह रही नदी की रेत का अधिकार संबंधित किसान को दिया जाए तो नुकसान कम होगा और पारदर्शिता भी बढ़ेगी। उनके अनुसार, मौजूदा नीति में बदलाव कर व्यावहारिक समाधान तलाशना जरूरी है। सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री श्रुति चौधरी ने स्पष्ट किया कि राज्य में हर वर्ष मानसून से पहले नदियों की डी-सिल्टिंग की कोई तय परंपरा नहीं है।
हालांकि, हाल के वर्षों में भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति को देखते हुए विशेष अभियान चलाए गए हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में टांगरी और मारकंडा नदियों की जलधारण क्षमता बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर गाद निकाली गई। 30 जून 2025 से पहले टांगरी नदी से लगभग 5.50 लाख घन मीटर और मारकंडा से करीब 37,500 घन मीटर मिट्टी हटाई गई।
मानसून 2026 से पहले बड़ा अभियान
सरकार ने आगामी मानसून से पहले और व्यापक डी-सिल्टिंग की योजना बनाई है। प्रस्ताव के अनुसार टांगरी नदी से 53.85 लाख घन मीटर, मारकंडा से 10.94 लाख घन मीटर और बेगना नदी से 0.60 लाख घन मीटर गाद निकाली जाएगी। इन कार्यों के लिए टेंडर प्रक्रिया जारी है और 30 जून तक काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। मंत्री ने कहा कि सरकार बाढ़ के खतरे को कम करने के लिए सतर्कता के साथ कार्य कर रही है और किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आने दी जाएगी।

