पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के 2002 के मामले में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को बरी कर दिया है। चीफ जस्टिस शील नागू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने तीन अन्य आरोपियों की सजा बरकरार रखी। पंचकूला स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने इस केस में राम रहीम और तीन अन्य को जनवरी 2019 में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
मई 2024 में भी हाईकोर्ट ने सीबीआई अदालत के एक आदेश को पलटते हुए डेरे के पूर्व प्रबंधक रणजीत सिंह की हत्या के केस में राम रहीम और चार अन्य को बरी कर दिया था। डेरा प्रमुख राम रहीम (58) अभी रोहतक की सुनारिया जेल में है। वह अपनी दो शिष्याओं से दुष्कर्म के जुर्म में 2017 में दी गयी 20 साल जेल की सजा काट रहा है। पत्रकार रामचंद्र छत्रपति को अक्तूबर 2002 में उनके घर के बाहर गोली मार दी गई थी। उनके अखबार ‘पूरा सच’ नेे डेरे में महिलाओं के यौन शोषण का मुद्दा उठाया था।
सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगा परिवार
सिरसा (हप्र) : दिवंगत रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने कहा कि यह फैसला निराशाजनक है। वह इस निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। अंशुल ने कहा कि वह 24 साल से अदालत में लड़ाई लड़ रहे हैं और इसे आगे भी जारी रखेंगे। उन्होंने कहा, हमारे पास जो भी कानूनी उपाय हैं, हम उनका इस्तेमाल करेंगे। हमें उम्मीद है कि सीबीआई भी हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देगी।
सच्चाई की जीत हुई : डेरा प्रवक्ता
डेरा प्रमुख को बरी किए जाने की खबर मिलने के साथ ही डेरा श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को बधाई देनी शुरू कर दी। डेरा सच्चा सौदा के प्रवक्ता जितेंद्र खुराना इंसा ने कहा कि सच्चाई की जीत हुई है।

