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ICT-BD ने बांग्लादेश की पूर्व PM शेख हसीना को दोषी ठहराया, मानवता के विरुद्ध अपराधों के लिए मौत की सजा सुनाई

अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण-बांग्लादेश (ICT-BD) ने सोमवार को शेख हसीना के खिलाफ फैसला सुनाया है। 453 पन्नों के फैसले में छह भागों के माध्यम से न्यायाधिकरण ने पाया कि शेख हसीना समेत तीन आरोपियों पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल और...

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शेख हसीना की फाइल फोटो।
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अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण-बांग्लादेश (ICT-BD) ने सोमवार को शेख हसीना के खिलाफ फैसला सुनाया है। 453 पन्नों के फैसले में छह भागों के माध्यम से न्यायाधिकरण ने पाया कि शेख हसीना समेत तीन आरोपियों पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल और पूर्व पुलिस महानिरीक्षक चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून ने जुलाई विद्रोह के दौरान मानवता के विरुद्ध अपराध किए थे।

विशेष रूप से, न्यायाधिकरण ने शेख हसीना को दो आरोपों में मृत्युदंड की सजा सुनाई है। वहीं, असदुज्जमां खान कमाल को एक आरोप में मृत्यु मौत की सजा दी गई है। बाकी आरोपों पर न्यायाधिकरण की बहस अभी चल रही है।

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बांग्लादेश की प्रमुख समाचार पत्र की वेबसाइट prothomalo के अनुसार मुख्य न्यायाधीश गुलाम मुर्तुज़ा मजूमदार ने फैसला पढ़ते समय मृत्युदंड पक्ष और विपक्ष दोनों के तर्कों का विस्तार से परीक्षण किया। अदालत ने कोटा सुधार आंदोलन, ढाका विश्वविद्यालय में छात्रों पर हुए हमले और प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की पृष्ठभूमि की पूरी कहानी को दर्ज किया है।

सुनवाई के दौरान न्यायालय को ऑडियो, वीडियो और गवाहों के बयान पेश किए गए थे। दस्तावेजों में दिखाया गया है कि जत्राबारी, रामपुरा, बड्डा, सावर, अशुलिया और रंगपुर समेत कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों को घातक गोलियों से निशाना बनाया गया था।

फैसले के दौरान टेलीफोन कॉल रिकॉर्ड भी सुनाए गए, जिनमें शेख हसीना और तत्कालीन सूचना मंत्री हसनुल हक इनु की बातचीत शामिल थी। अदालत ने मानवाधिकार उल्लंघन पर विभिन्न अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों को भी माना और उनकी गंभीरता को स्वीकार किया।

यह मामला ICC में जन-विद्रोह के दौरान हत्या व अन्य अपराधों के लिए दायर पहला मुकदमा है, और यह फैसला ऐतिहासिक महत्व रखता है। तीनों आरोपियों में से शेख हसीना और असदुज्जमां खान फिलहाल फरार बताए गए हैं और कथित तौर पर भारत में रह रहे हैं। तीनों पर कुल पांच गंभीर आरोप हैं: भड़काऊ भाषण देना, प्रदर्शनकारियों पर घातक हथियारों का इस्तेमाल करने का आदेश देना, रंगपुर में छात्र की हत्या, चंखरपुल में छह प्रदर्शनकारियों की हत्या, और अशुलिया में छह लोगों को जिंदा जलाने का आरोप।

वहीं, इस फैसले के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई और राष्ट्रीय राजधानी में पुलिस को हिंसक प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का आदेश दिया गया है।

सजा सुनाए जाने से पूर्व हसीना ने कहा कि अपनी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं से कहा कि वे घबराएं नहीं। अभियोजन पक्ष ने रविवार को हसीना के लिए मौत की सजा की मांग दोहराई थी।

आईसीटी-बीडी के अभियोजक गाजी एमएच तमीम ने संवाददाताओं को से कहा, ‘‘हमने हसीना के लिए यथासंभव अधिकतम सजा की मांग की है। इसके अतिरिक्त, हमने दोषी की संपत्ति जब्त करने और उसे (पिछले साल के प्रदर्शन के दौरान) शहीदों और घायलों के परिवारों में वितरित करने का अनुरोध किया है।''

तमीम ने कहा कि आईसीटी-बीडी कानून हसीना को उच्चतम न्यायालय के शीर्ष अपीलीय प्रभाग में फैसले को चुनौती देने से तब तक रोकेग, जब तक कि वह आत्मसमर्पण नहीं कर देतीं या फैसले के बाद 30 दिन के भीतर गिरफ्तार नहीं कर ली जातीं। सरकारी समाचार एजेंसी ‘बांग्लादेश संगबाद संस्था' (बीएसएस) की खबर के मुताबिक, गृह सलाहकार जहांगीर आलम चौधरी ने कहा, ‘‘देश भर में अप्रिय घटनाओं को रोकने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने अपनी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं।''

फैसले से पहले कानून और व्यवस्था की स्थिति को लेकर तनाव पैदा होने के बीच बीजीबी की तैनाती के अलावा, ढाका में पुलिस को हिंसक प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का आदेश दिया गया है।

स्थानीय अखबारों की खबर के अनुसार, ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस (डीएमपी) आयुक्त एसएम सज्जात अली ने कहा, ‘‘मैंने वायरलेस पर संदेश दिया कि जो कोई भी बसों में आग लगाए या जान से मारने के इरादे से देसी बम फेंके, उसे गोली मार दी जानी चाहिए। हमारे कानून में यह अधिकार स्पष्ट रूप से दिया गया है।''

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