राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् (एनसीईआरटी) ने कक्षा-9 के पाठ्यक्रम में व्यक्तिगत आयकर को शामिल किया है। इसमें ईमानदारी से कर चुकाने को नागरिकों का महत्वपूर्ण दायित्व बताने वाला संदेश भी दिया गया है। नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के छह महीने बाद, मंगलवार को ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी इंडिया एंड बियॉन्ड-पार्ट 2’ शीर्षक से किताब जारी की गई।
पाठ्यपुस्तक का पहला भाग जून में जारी किया गया था। एनसीईआरटी प्रमुख दिनेश प्रसाद सकलानी के अनुसार, अब छात्र नयी व्यवस्था के तहत कर स्लैब के हिसाब से आयकर की वास्तविक गणना को समझ सकते हैं। इस आयु के बच्चों (कक्षा 9) के लिए यह पहली बार है। ‘अपनी व्यक्तिगत आय को प्रबंधित करना’ शीर्षक वाला अध्याय कहता है कि पैसे को प्रबंधित करने का सफर बचपन से ही शुरू हो जाता है। पाठ्यपुस्तक के अनुसार, पैसे का समझदारी से प्रबंधन करने का मतलब सिर्फ ज्यादा कमाना नहीं है, बल्कि सोच-समझकर फैसले लेना है, चाहे वह खर्च करना हो, बचत करना हो, निवेश करना हो, जोखिमों से सुरक्षा हो, ज़िम्मेदारी से उधार लेना हो या कर चुकाना हो। कहा गया है कि आज लोग जो फैसले लेते हैं, वे उनके आर्थिक भविष्य को आकार देते हैं और आर्थिक अवसरों व चुनौतियों को प्रबंधित करते हुए आर्थिक स्थिरता की क्षमता तय करते हैं।

