हरियाणा में दो दिन में 62 बर्खास्त, 10 निलंबित; सरकार की कार्रवाई के खिलाफ आंदोलन का नया चरण
72 कर्मचारियों पर कार्रवाई के बाद सफाई कर्मियों का आंदोलन अब जन पंचायतों तक
हरियाणा में सफाई कर्मचारियों और सीवरमैन की हड़ताल अब सरकार व कर्मचारी संगठनों के बीच सीधे टकराव के अगले चरण में पहुंच गई है। सरकार ने आज 38 और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई कर दी। इनमें 30 को बर्खास्त और 8 को निलंबित किया गया है। इससे पहले सोमवार को 32 कर्मचारियों को बर्खास्त और दो को निलंबित किया गया था। दो दिन में 72 कर्मचारियों पर कार्रवाई हो चुकी है।
सरकार की सख्ती के जवाब में कर्मचारी संगठनों ने आंदोलन को और व्यापक बनाने का फैसला किया है। 9 सितंबर को प्रदेशभर में शोक सभाएं होंगी। 10 से 12 सितंबर तक शहरों में जन न्याय पंचायतें लगाई जाएंगी। इसके बाद 13 सितंबर को कुरुक्षेत्र में राज्य स्तरीय जन न्याय पंचायत होगी। कर्मचारी नेताओं ने मुख्यमंत्री से सीधे हस्तक्षेप कर बातचीत शुरू करने की मांग की है।
बर्खास्तगी का दायरा बढ़ा
मंगलवार की कार्रवाई में पानीपत के 16, झज्जर के 19 और हिसार के दो कर्मचारी शामिल हैं। एक अन्य कर्मचारी के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। सोमवार की कार्रवाई को मिलाकर सरकार ने दो दिन में 62 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त की हैं, जबकि 10 को निलंबित किया गया है। यह कार्रवाई उस समय हुई है जब सफाई कर्मचारी और सीवरमैन एक महीने से अधिक समय से हड़ताल पर हैं।
जॉब सिक्योरिटी पर नहीं बनी बात
आंदोलन का सबसे बड़ा मुद्दा करीब 13,500 कर्मचारियों का नियमितीकरण है। सरकार कर्मचारियों को 60 वर्ष की आयु तक सेवा सुरक्षा और दूसरी सुविधाएं देने के पक्ष में है। कर्मचारियों का कहना है कि संविदा रोजगार अधिनियम के तहत प्रस्तावित जॉब सिक्योरिटी नियमित सरकारी नौकरी का विकल्प नहीं हो सकती। यही बिंदु बातचीत में सबसे बड़ा गतिरोध बना हुआ है।
नगर पालिका कर्मचारी संघ हरियाणा और हरियाणा अग्निशमन विभाग कर्मचारी यूनियन ने सरकार की कार्रवाई का विरोध किया है। राज्य प्रधान नरेश कुमार शास्त्री, महासचिव मांगे राम तिगरा, अग्निशमन विभाग कर्मचारी यूनियन के राज्य प्रधान राजेंद्र सिंद और महासचिव गुलशन भारद्वाज ने कहा कि कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों के समान सेवा लाभ देने के लिए विशेष कानून बनाया जाना चाहिए।
अब शहरों में ‘जन न्याय पंचायत’
कर्मचारी संगठन अब आंदोलन को केवल हड़ताल और प्रदर्शन तक सीमित रखने के बजाय इसे जन समर्थन से जोड़ने की तैयारी में हैं। 10 से 12 सितंबर तक होने वाली जन न्याय पंचायतों में कर्मचारियों की मांगों और सरकार की कार्रवाई को जनता के बीच ले जाने की रणनीति है। 13 सितंबर को कुरुक्षेत्र में होने वाली राज्य स्तरीय पंचायत में आगे के आंदोलन की दिशा तय की जाएगी। यूनियनों ने 13 मई को पालिका एवं फायर यूनियनों के साथ हुए समझौते को लागू करने की मांग भी दोहराई है।
दो कर्मचारियों की मौत का मुद्दा भी उठाया
कर्मचारी नेताओं ने कुरुक्षेत्र के रोहित और करनाल के कुलदीप की मौत का मामला भी उठाया। उन्होंने दोनों परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को नियमित सरकारी नौकरी देने की मांग की है। अब कर्मचारियों की नजर 13 सितंबर की राज्य स्तरीय जन न्याय पंचायत पर है। सरकार की ओर से कार्रवाई का सिलसिला और कर्मचारी संगठनों की ओर से आंदोलन का विस्तार साथ-साथ चल रहे हैं।

