Tribune
PT
Subscribe To Print Edition About the Dainik Tribune Code Of Ethics Advertise with us Classifieds Download App
search-icon-img
Advertisement

असफलता का डर हम सभी में घर कर गया होगा, रोहित ने ICC के लंबे समय तक के खिताबी सूखे पर कहा

मुझे जज्बे के साथ बेखौफ होकर खेलना होगा : रोहित

  • fb
  • twitter
  • whatsapp
  • whatsapp
Advertisement

टी20 विश्व कप विजेता और पूर्व कप्तान रोहित शर्मा ने शुक्रवार को कहा कि 2011 से 2024 तक भारत के आईसीसी प्रतियोगिताओं में खिताबी सूखे का एक कारण देश के शीर्ष बल्लेबाजों में असफलता का डर हो सकता है।

भारतीय टीम ने 2011 में महेंद्र सिंह धोनी के नेतृत्व में वनडे विश्व कप जीता था। टीम को अगले बड़े ट्रॉफी की प्रतीक्षा 2024 तक करनी पड़ी, जब रोहित की कप्तानी में टी20 विश्व कप का खिताब अपने नाम किया। रोहित ने 'जियोहॉटस्टार' के कार्यक्रम में कहा कि मैं हमेशा मानता रहा हूं कि जब परिस्थितियां खराब चल रही हों, वह हमेशा के लिए खराब नहीं रहेंगी। एक दिन सुधार अवश्य आएगा। मैंने कभी नहीं सोचा था कि इसमें 13 साल लग जाएंगे। मैं नहीं सोचता था कि इतना समय लगेगा। पिछले विश्व कप की जीत 2011 में थी और फिर हमने 2024 में जीता। यह 13 साल का अंतराल है। हां, 2013 में चैंपियंस ट्रॉफी जीती थी, इसलिए तकनीकी रूप से यह 11 साल का आईसीसी ट्रॉफी सूखा था।

Advertisement

11 साल भी काफी लंबा समय है। हम हमेशा मानते थे कि हमें सही काम करना है और हम सही काम करते रहे, लेकिन कुछ कमी थी। कुछ ऐसा था जो हम नहीं कर पा रहे थे। मुझे लगता है कि इसमें शायद असफलता का डर हम सभी में घर कर गया था, हो सकता है, या नहीं, मुझे नहीं पता, लेकिन मेरी भावना यही थी। रोहित अब सिर्फ वनडे प्रारूप में खेलते है। उन्होंने कहा कि उनकी व पूर्व मुख्य कोच राहुल द्रविड़ की टीम प्रबंधन ने खिलाड़ियों को डर से मुक्त करने के लिए उन्हें स्वतंत्रता और भूमिका की स्पष्टता दी।

Advertisement

हमने डर को खत्म करने की कोशिश की। हमने खिलाड़ियों को स्वतंत्रता देकर और साफ बता कर कि 'तुम इस काम के लिए जिम्मेदार हो, जो कुछ भी होगा हम तुम्हारा साथ देंगे।' इसके साथ ही उनकी भूमिका और हमारी अपेक्षाओं को भी स्पष्ट किया। मैं व्यक्तिगत रूप से खिलाड़ियों से बात करता था और कहता था, 'यह तुम्हारी भूमिका है और हमें यह चाहिए।'

इससे खिलाड़ी और कप्तान , कोच के बीच भरोसा बनता है। जब समय आता है प्रदर्शन का, तो खिलाड़ी डरते नहीं, बल्कि जिम्मेदारी लेते हैं। क्योंकि जब कप्तान और कोच ने साफ कहा कि यही तुम्हारी भूमिका है, तो डरने की कोई बात नहीं। रोहित ने 2019 के इंग्लैंड एवं वेल्स विश्व कप को मानसिक बदलाव का एक बड़ा सबक बताते हुए कहा कि 2019 विश्व कप मेरे लिए बहुत बड़ा सबक था।

मैंने वहां बहुत रन बनाए, लेकिन हमने विश्व कप नहीं जीता। तब मैंने खुद से पूछा, इन रन का क्या फायदा? यह मेरी खुशी के लिए खेलना है। यही कारण है कि 2020 से मैंने अलग तरह से सोचना शुरू किया। जो बदलाव मैंने 2022 और 2023 में लागू किया, उसे अपनाने में मुझे दो साल लगे। मुझे समझ आया कि मुझे जज्बे के साथ बेखौफ होकर खेलना होगा। वरना यह मायने नहीं रखता कि मैं 40 या 90 रन पर आउट हुआ।

Advertisement
×