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अगर मैं नतीजों पर गौर करूं, तो हर चीज पर रिएक्शन देना शुरू कर दूंगा; फॉर्म खराब हुई तो भी नहीं टूटे वरुण

विकेट मिले या नहीं, वरुण चक्रवर्ती नहीं बदलेंगे अपना तरीका, बताया सफलता का मंत्र

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Varun Chakravarthy : भारत के स्टार स्पिनर वरुण चक्रवर्ती ने प्रतिकूल परिस्थितियों में भी 'प्रक्रिया' को सर्वोपरि रखते हुए 'परिणामों पर प्रतिक्रिया न करने' की कला सीख ली है। अपने करियर के अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुके इस 35 वर्षीय स्पिनर का टी20 विश्व कप में प्रदर्शन अपेक्षित नहीं रहा, हालांकि भारत ने खिताब जीता था। आईपीएल और इंग्लैंड में खेली गई टी20 सीरीज में भी उनका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा। चोटिल होने के कारण उन्हें इंग्लैंड दौरा बीच में ही छोड़ना पड़ा था।

अफगानिस्तान के खिलाफ यहां खेले गए पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच में चक्रवर्ती ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 16 रन देकर एक विकेट लिया। चक्रवर्ती से पूछा गया कि जब उनके अंतरराष्ट्रीय करियर के शुरुआती चरण की तुलना में उनका प्रदर्शन उतना अच्छा नहीं रहा, तो वह इससे कैसे निपटे। चक्रवर्ती ने भारत की सात विकेट से जीत के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा, ''आप परिणामों की बात कर रहे हैं। मैं परिणामों के आधार पर निर्णय नहीं ले सकता। अगर मैं परिणामों के आधार पर निर्णय लूंगा, तो मैं छोटी-छोटी बातों पर प्रतिक्रिया देने लगूंगा।''

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चक्रवर्ती ने कहा, ''अगर परिणाम मेरे पक्ष में होंगे तो मैं बहुत खुश हो जाऊंगा। अगर परिणाम मेरे अनुकूल नहीं रहे, तो मैं बहुत दुखी हो जाऊंगा। मैं इस तरह से फैसला नहीं कर सकता। इसलिए मेरे लिए सबसे अच्छा तरीका यही है कि मैं प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित रखूं। अगर गेंद अच्छी है और फिर भी उससे विकेट नहीं मिलता तो तब भी मैं उस पर कायम रहूंगा। लेकिन अगर गेंद खराब है और उस पर विकेट मिल जाता है, तो मुझे जाकर उस पर दोबारा काम करना होगा। यही नियम है।'' चक्रवर्ती ने 49 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 75 विकेट लिए हैं। उनका मानना ​​​​है कि किसी खिलाड़ी के प्रदर्शन का मापदंड केवल विकेटों की संख्या से ही नहीं होना चाहिए।

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उन्होंने कहा, ''आपने कहा कि सब कुछ विकेट हासिल करने से जुड़ा है लेकिन ऐसा नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि मैं सही जगह पर गेंदबाजी कर रहा हूं या नहीं। उसके बाद जो भी होता है, वह मेरे नियंत्रण में नहीं है। गेंद फेंकने के बाद वह टर्न लेती है या नहीं, यह मेरे नियंत्रण में नहीं है। मैं परिणामों पर ध्यान नहीं देता। इंग्लैंड का अनुभव भी मेरे लिए अच्छा रहा। वहां हम जीत नहीं पाए, इसका मतलब यह नहीं कि सब कुछ बेकार गया। सही काम करने से बहुत कुछ सीखने को मिलता है। इसलिए, कुछ भी व्यर्थ नहीं जाता। प्रत्येक मैच से कुछ सीखने को मिलता है भले ही परिणाम हमारे अनुकूल न रहे।''

उनका मानना ​​है कि चोटों को लेकर ज्यादा परेशान नहीं होना चाहिए। चक्रवर्ती ने कहा, ''चोटिल होना खेल का हिस्सा है। इससे यह पता चलता है हम मेहनत कर रहे हैं, अपना सर्वश्रेष्ठ दे रहे हैं। कभी-कभी हम अपनी सीमाओं को लांघ देते हैं और तब शरीर हार मान लेता है। ऐसे में हमें एक कदम पीछे हटना पड़ता है, बेहतर काम करना पड़ता है और पहले से ज़्यादा मज़बूत होकर वापसी करनी पड़ती है।''

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