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Container Housing: एशियाई खेलों में कंटेनर आवास में रहेंगे खिलाड़ी, साई कर रहा भारतीय दल को तैयार

Container Housing: छह फीट से कुछ ही अधिक लंबे बिस्तर, पास-पास सिमटी दीवारें और जरूरत भर का सामान रखने की जगह। आमतौर पर ऐसी जगह किसी को असहज कर सकती है लेकिन भारतीय खिलाड़ियों के लिए यह महज एक छोटा-सा...

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पटियाला, पंजाब के नेताजी सुभाष नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ स्पोर्ट्स में मीडिया के साथ बातचीत के दौरान, डिस्कस थ्रोअर सीमा कालीरमना जापान के आइची-नागोया में होने वाले 2026 एशियाई खेलों की तैयारी कर रहे खिलाड़ियों के लिए भारत के पहले कंटेनर-आधारित आवास के दरवाज़े पर खड़ी हैं। स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (SAI) ने शुक्रवार को पटियाला में एथलीट क्वार्टर का मॉडल पेश किया। फ़ोटो: पीटीआई
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Container Housing: छह फीट से कुछ ही अधिक लंबे बिस्तर, पास-पास सिमटी दीवारें और जरूरत भर का सामान रखने की जगह। आमतौर पर ऐसी जगह किसी को असहज कर सकती है लेकिन भारतीय खिलाड़ियों के लिए यह महज एक छोटा-सा कमरा नहीं, बल्कि एशियाई खेलों से पहले की खास तैयारी है।

पटियाला स्थित नेताजी सुभाष राष्ट्रीय खेल संस्थान (एनएसएनआईएस) में इन दिनों कुछ खिलाड़ी कंटेनर के भीतर रात गुजार रहे हैं। इसका मकसद उन्हें उस तरह के आवास का अभ्यस्त बनाना है, जिसका सामना उन्हें जापान में होने वाले एशियाई खेलों के दौरान करना होगा। इस बार 19 सितंबर से शुरू हो रहे आइची-नागोया एशियाई खेलों में पारंपरिक खेल गांव नहीं होगा।

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खिलाड़ियों के ठहरने का इंतजाम कंटेनरों, क्रूज और अन्य वैकल्पिक व्यवस्थाओं में किया जा रहा है। ऐसे में भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) ने पटियाला और बेंगलुरु स्थित अपने केंद्रों में अस्थायी कंटेनर कमरे तैयार किए हैं, ताकि खिलाड़ी पहले ही इस अनोखी व्यवस्था का अनुभव ले सकें।

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साइ के उप महानिदेशक विनीत कुमार ने एनएसएनआईएस में चुनिंदा पत्रकारों से बातचीत में कहा, ''दो वर्ष पहले जब यह तय हुआ कि एशियाई खेलों के दौरान खिलाड़ियों के ठहरने की व्यवस्था पारंपरिक खेल गांव की तर्ज पर नहीं, बल्कि कंटेनर, क्रूज आदि जैसे अनूठे विकल्पों में की जाएगी, तभी खेल मंत्री की सोच थी कि खिलाड़ियों को भी पहले से इसी तरह के माहौल का अभ्यस्त कराया जाना चाहिए। इसके लिए एक तरह के सिमुलेटर जैसी व्यवस्था तैयार करने की योजना बनाई गई थी।''

कुमार एनएसएनआईएस पटियाला के वरिष्ठ कार्यकारी निदेशक भी हैं। उन्होंने कहा, ''इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खिलाड़ियों को नए तरह के आवास में रहने पर घुटन या असहजता महसूस न हो। वे इस बात से हैरान न हों कि उन्हें किस तरह के आवास में ठहराया गया है। उन्हें किसी तरह का झटका या मानसिक दबाव महसूस न हो और वे बिना किसी तनाव के खेलों में हिस्सा ले सकें।''

बड़े कमरों और अपने खेल उपकरणों के लिए पर्याप्त जगह के आदी खिलाड़ियों के लिए यह सिमटा हुआ स्थान शुरुआत में थोड़ा अजीब जरूर लग सकता है, लेकिन दो बार के एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता गोला फेंक खिलाड़ी तजिंदरपाल सिंह तूर का अनुभव सकारात्मक रहा। तूर ने कहा, ''बाहर से कंटेनर छोटा दिखाई देता है लेकिन जरूरी की सभी सुविधाएं मौजूद हैं। मुझे पहली बार इस तरह की सीमित जगह में रहने का अनुभव हुआ, लेकिन यहां समय बिताने से मैं इसका अभ्यस्त हो गया हूं।''

छह फुट चार इंच लंबे तूर ने कहा, ''अगर मैं सीधे जापान पहुंचकर पहली बार ऐसे कमरे में रहता तो यह बात एक-दो दिन तक मेरे दिमाग में बनी रहती।'' साइ की यही कोशिश है कि जापान पहुंचने के बाद खिलाड़ियों के मन में आवास को लेकर कोई नया सवाल न उठे। कुमार ने कहा, ''खिलाड़ी का मनोविज्ञान ऐसा होता है कि अगर इस तरह की कोई लॉजिस्टिक समस्या सामने आती है तो उसका असर उसके प्रदर्शन पर पड़ता है। इसलिए खेल मंत्री की सोच थी कि ऐसी स्थिति पैदा ही न हो और खिलाड़ी पूरी तरह अपने खेल पर ध्यान केंद्रित कर सकें।''

पटियाला में पुरुष और महिला खिलाड़ियों के लिए अलग-अलग दो 'सिमुलेशन' कक्ष तैयार करने से पहले खेल मंत्रालय और साइ की एक टीम ने जापान का दौरा कर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया था। इन कक्षों को इस तरह तैयार किया गया है कि भारतीय खिलाड़ियों को एशियाई खेलों के दौरान जिस तरह की आवास व्यवस्था का सामना करना पड़ सकता है, उसका पहले से अनुभव मिल सके।

कुमार ने बताया, ''हमने खिलाड़ियों के ठहरने की क्रमवार सूची तैयार की है और वे बारी-बारी से यहां रुक रहे हैं। उन्हें रात में भी यहीं ठहरना होता है, ताकि अगली सुबह उन्हें पता हो कि इस व्यवस्था में उन्हें किस तरह अपनी दिनचर्या शुरू करनी है और कामकाज करना है।'' यह अभ्यास 28 अगस्त से शुरू हुआ था और अब तक करीब आठ खिलाड़ी कंटेनर में रहकर इस व्यवस्था का अनुभव ले चुके हैं।

राष्ट्रमंडल खेलों की कांस्य पदक विजेता चक्का फेंक खिलाड़ी सीमा कालिरामणा के लिए शुरुआत में यह अनुभव थोड़ा मुश्किल रहा। उन्होंने बताया, ''मैं दो रात कंटेनर में रही। थ्रो खिलाड़ियों को अपने अभ्यास और उपकरणों के कारण अपेक्षाकृत ज्यादा जगह की जरूरत होती है, इसलिए मुझे कमरे को लेकर थोड़ा समायोजन करना पड़ा।''

उन्होंने कहा, ''दूसरा दिन अच्छा रहा और मैं ठीक से सो पाई। एक खिलाड़ी के जीवन में बहुत कुछ परिस्थितियों के अनुसार ढालना पड़ता है, तभी जाकर वह कुछ हासिल कर पाता है।'' उनके अनुसार, इस सिमुलेशन अभ्यास ने अनिश्चितता की एक बड़ी वजह को दूर कर दिया है। उन्होंने कहा, ''यहां ठहरने से हमें काफी मदद मिलेगी, क्योंकि अब हमें घुटन जैसा महसूस नहीं होगा। इसके लिए मैं साइ की आभारी हूं।

जापान में आवास व्यवस्था कैसी होगी, इसे लेकर जो आशंका थी, वह अब दूर हो गई है। मुझे अब बेहतर महसूस हो रहा है, क्योंकि हमें यह सोचकर चिंता नहीं करनी पड़ेगी कि वहां व्यवस्था कैसी होगी और हमें कैसा महसूस होगा।'' साइ ने सीमित जगह का अधिकतम इस्तेमाल करने की कोशिश की है। करीब 13 मीटर लंबे और तीन मीटर चौड़े इस कंटेनर में दोनों सिरों पर दो-दो खिलाड़ियों के रहने के लिए बेडरूम जैसी जगह है। इनके बीच एक संकरा गलियारा है। अंदर दो स्प्लिट एयर कंडीशनर, वॉशिंग मशीन वाला छोटा लॉन्ड्री क्षेत्र और फ्रिज व सिंक से युक्त कॉम्पैक्ट किचन है।

बाथरूम को वॉश बेसिन, टॉयलेट और शॉवर के लिए अलग-अलग हिस्सों में बांटा गया है। सामान रखने के लिए चार कैबिनेट हैं। इसके अलावा बिस्तरों के नीचे भारी किट बैग रखने की जगह भी है। खिलाड़ियों से मिली प्रतिक्रिया को सकारात्मक बताते हुए विनीत कुमार ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, ''उन्हें देखकर लगता है, 'ये जंगल में मंगल कैसे हो गया।'' इस प्रयोग में पर्यावरणीय स्थिरता का पहलू भी शामिल है। पटियाला स्थित एनएसएनआईएस में ये दोनों कंटेनर पहले से उपलब्ध थे।

कोविड-19 महामारी के दौरान इनका इस्तेमाल भारोत्तोलन और एथलेटिक्स के उपकरण रखने के लिए किया गया था। एशियाई खेलों के लिए सिमुलेशन अभ्यास पूरा होने के बाद इनका खेल संबंधी उपयोग समाप्त हो जाएगा, लेकिन कंटेनरों को बेकार नहीं छोड़ा जाएगा। इन्हें अतिथि गृहों में तब्दील करने की योजना है। इसके लिए दो बिस्तर हटाकर दो लोगों के साझा ठहरने के लिए कमरे तैयार किए जाएंगे। भाषा

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