सुजीत कलकल की ऐतिहासिक जीत से गांव इमलोटा में जश्न, 9-2 से पिछड़ने के बाद 10-9 से जीता मुकाबला
उज्बेकिस्तान के पहलवान को रोमांचक अंदाज में हराकर बढ़ाया देश का मान, पैतृक गांव के अखाड़े में पहलवानों और कोचों ने मिठाई खिलाकर मनाई जीत
एशियाई खेलों में पहलवान सुजीत कलकल की रोमांचक जीत के बाद उनके पैतृक गांव इमलोटा में खुशी का माहौल है। गांव के अखाड़े में पहलवानों, प्रशिक्षकों और ग्रामीणों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर जीत का जश्न मनाया। सुजीत ने पुरुषों के 65 किलोग्राम फ्रीस्टाइल कुश्ती के फाइनल में ताजिकिस्तान के अब्दुलमजीद कुडीएव को 10-9 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। खास बात यह रही कि मुकाबले में एक समय सुजीत 2-9 से पीछे चल रहे थे, लेकिन आखिरी दौर में शानदार वापसी करते हुए उन्होंने लगातार अंक जुटाए और मुकाबला अपने नाम कर लिया।
आखिरी पलों में पलटा मुकाबला
सुजीत की जीत को इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि फाइनल के दौरान वह सात अंकों से पिछड़ रहे थे। मुकाबला खत्म होने से कुछ समय पहले तक स्कोर उनके पक्ष में नहीं था। इसके बाद उन्होंने लगातार आक्रामक दांव लगाए और अंतर कम करते हुए मुकाबला 10-9 पर पहुंचा दिया। अंतिम क्षणों में निर्णायक दांव लगाकर सुजीत ने स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।
इससे पहले सेमीफाइनल में सुजीत ने जापान के मौजूदा ओलंपिक चैंपियन कोटारो कियूका को 3-3 की बराबरी के बाद तकनीकी मानदंड के आधार पर हराकर फाइनल में जगह बनाई थी। इस जीत ने पहले ही उनका पदक पक्का कर दिया था।
गांव के अखाड़े से अंतरराष्ट्रीय मैट तक का सफर
सुजीत की इस उपलब्धि से उनके गांव इमलोटा के कुश्ती अखाड़े में विशेष उत्साह है। कुश्ती संघ के सचिव योगेश इमलोटा ने कहा कि गांव की मिट्टी से निकलकर जापान के अंतरराष्ट्रीय मैट तक सुजीत ने अपनी प्रतिभा और मेहनत का परिचय दिया है। उनकी जीत ने पूरे क्षेत्र और देश का मान बढ़ाया है।
खेल प्रशिक्षक बिजेंद्र सिंह ने कहा कि दादरी जिले से एशियाई खेलों में भाग लेने वाले चार प्रतिभागियों में से तीन ने स्वर्ण पदक हासिल किए हैं। उन्होंने इसे जिले के लिए गौरव का क्षण बताया।
उभरते पहलवानों को मिलेगा हौसला
कोच महेंद्र सिंह ने कहा कि सुजीत की सफलता ग्रामीण क्षेत्र के उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो गांव के अखाड़ों में रहकर कुश्ती की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसी उपलब्धियां मिलने से युवाओं का कुश्ती के प्रति रुझान और बढ़ेगा।
इमलोटा में जीत की खबर पहुंचते ही अखाड़े में पहलवानों और कोचों ने मिठाई बांटी। ग्रामीणों ने कहा कि राष्ट्रगान की धुन के साथ सुजीत को स्वर्ण पदक लेते देखना पूरे गांव के लिए भावुक और गर्व का क्षण रहा।
2028 ओलंपिक को लेकर उम्मीदें
स्थानीय कुश्ती पदाधिकारियों और प्रशिक्षकों ने सुजीत से आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा कि अब सुजीत का लक्ष्य विश्व चैंपियनशिप और 2028 ओलंपिक में भारत के लिए पदक जीतना है।
सुजीत की यह एशियाई खेलों की पहली स्वर्ण पदक उपलब्धि है और उन्होंने 65 किलोग्राम वर्ग में भारत को एक और बड़ी सफलता दिलाई है। इस वर्ग में इससे पहले योगेश्वर दत्त और बजरंग पूनिया भी एशियाई खेलों में स्वर्ण जीत चुके हैं।

