एक के बाद जिस तरह दूसरा
आता है, जाता है अंक और आदमी
Advertisement
ठीक उसी तरह मौसम और रंग
Advertisement
परिप्रेक्ष्य कामना वसंत
ठीक उसी तरह प्रेम और दु:ख
मैं भी और तुम भी।
वसंत की लिपि
वसंत की लिपि अदृश्य
दृश्य में अफ़वाह और दृष्टिकोण
पल-पल बदलती है दुनिया
अपने विचारों के समीकरण
अपना क्या कुछ?
प्रश्न-वसंत
दिव्य है,भव्य है चेतना
किन्तु उससे कहीं अधिक प्रबल
और-और शक्तिशाली है वसंत
जो पुकारता है प्रश्न बार-बार
जो हर कहीं-हर कहीं।
Advertisement
×

