साहित्य जगत में करीब पौन सदी की गरिमामय परंपरा की अगली कड़ी में ‘नवनीत’ का ताजा अंक विश्व-साहित्य को समझने के लिए नई दृष्टि प्रदान करता है। अनुभवी संपादक विश्वनाथ सचदेव के मार्गदर्शन में प्रकाशित इस पत्रिका के समीक्ष्य अंक में दमोदर खड़से का लेख शेक्सपियर के गांव में..., फिलस्तीनी कथाकार ‘जद्द हिलाल’, ऐनी एरनौ की फ्रेंच, उरुग्वे की एडुआर्डो गेलीआनो, हारुकी मुराकामी की जापानी, मो यान की चीनी व नजीब अहफूज़ की अरबी कहानी नये साल के पहले अंक का विशेष आकर्षण है।
पत्रिका : भवन्स नवनीत संपादक : विश्वनाथ सचदेव प्रकाशक : भारतीय विद्या भवन, मुंबई पृष्ठ : 194 मूल्य : रु. 45.
उर्मि कृष्ण का भावपूर्ण स्मरण
बेहद सहज, सरल और सारगर्भित सृजन से उत्तर भारत के साहित्यिक परिदृश्य में विशिष्ट योगदान देने वाली श्रीमती उर्मि कृष्ण का अवसान साहित्य जगत की अपूरणीय क्षति है। उनके संपादन में अनवरत प्रकाशित होती रही ‘शुभ तारिका’ पत्रिका के ‘श्रीमती उर्मि कृष्ण स्मृति विशेषांक’ में साहित्य साधकों व पाठकों के मर्मस्पर्शी उद्गार उनके योगदान पर मोहर लगाते हैं। गद्य-पद्य विधाओं में तमाम लेखकों की श्रद्धांजलि भाव-विभोर करती है। विश्वास किया जाना चाहिए कि विजय कुमार के संपादन में पत्रिका का प्रकाशन नियमित रूप से जारी रहेगा।
पत्रिका : शुभ तारिका संपादक : विजय कुमार प्रकाशक : लेखन महाविद्यालय, कृष्णदीप, अंबाला पृष्ठ : 106 मूल्य : रु. 25.
सारगर्भित सृजन की शीतल वाणी
त्रैमासिक ‘शीतल वाणी’ का हालिया संयुक्तांक मुंशी प्रेमचंद साहित्य के मर्मज्ञ डॉ. कमल किशोर गोयनका पर केंद्रित है। यह अंक प्रेमचंदीय चेतना, सरोकार और आलोचनात्मक विवेक का दस्तावेज है। उनके साहित्यिक अवदान पर केंद्रित डॉ. देवेन्द्र दीपक, डॉ. प्रदीप जैन, कमलेश भट्ट कमल, अशोक मिश्र आदि के आलेखों तथा दिविक रमेश, डॉ. चंद्रपाल शर्मा, डॉ. लालित्य ललित के संस्मरणों और डॉ. लता अग्रवाल तलुजा द्वारा लिए गए साक्षात्कारों ने अंक को गरिमा प्रदान की है। अंक की विशेष उपलब्धि कथाकार सुभाष पंत पर दी गई सामग्री है।
पत्रिका : शीतल वाणी संपादक : डॉ. वीरेन्द्र आज़म प्रकाशक : सृजन प्रकाशन, अंबाला रोड, सहारनपुर पृष्ठ : 80 मूल्य : रु. 50.
हरियाणवी सरोकारों का सृजन
हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी की पत्रिका ‘हरिगंधा’ के हालिया अंक में सभी साहित्यिक स्तंभों के साथ सारगर्भित और पठनीय सामग्री संगृहीत की गई है। आचार्य विनोबा भावे, सरदार पटेल और राष्ट्रीय सुरक्षा, ‘हरि की धरा हरियाणा संस्कृति, शौर्य और समृद्धि का संगम’, शिक्षा नीति में भारतीयता और स्वदेशी मूल्यों का समावेश, ‘हरियाणवी लोक जीवन में कुएं का महत्व : लोक विश्वास और मान्यताएं’ शीर्षक लेख पठनीय हैं। इसके अलावा कहानी, हास्य-व्यंग्य, काव्य, पुस्तक चर्चा, साहित्यिक गतिविधियां तथा सूचनाएं आदि स्थायी स्तंभ यथावत हैं।
पत्रिका : हरिगंधा संपादक : मुकेश लता प्रकाशक : हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, पंचकूला पृष्ठ : 88 मूल्य : रु. 15.
साहित्य की आधारशिला
साहित्य, कला एवं संस्कृति की त्रैमासिक पत्रिका ‘आधारशिला साहित्यिम्’ का जनवरी अंक अपने सभी स्थायी स्तंभों के साथ इस मायने में खास है, क्योंकि इसमें संस्था द्वारा कराई गई कहानी प्रतियोगिता के बहुप्रतीक्षित परिणाम घोषित किए गए हैं। पत्रिका का समीक्ष्य अंक सिने जगत के महान अभिनेता धर्मेंद्र को श्रद्धांजलि स्वरूप समर्पित है। वहीं, इस अंक में कहानी प्रतियोगिता में पुरस्कृत कहानीकारों की पुरस्कृत कहानियां भी प्रकाशित हुई हैं। साथ ही, साहित्य की विभिन्न विधाओं पर केंद्रित रचनाएं भी शामिल की गई हैं।
पत्रिका : आधारशिला साहित्यम् संपादक : डॉ. अनिता सुरभि प्रकाशक : आधारशिला साहित्यम्, चंडीगढ़ पृष्ठ : 62 मूल्य : रु. 80.

