बाल कहानी

फिर गया पानी

फिर गया पानी

इंद्रजीत कौशिक

चिंकी लोमड़ी को गाजर बहुत पसंद थी । जहां भी उसे गाजर नज़र आती उसके मुंह में पानी आ जाता। पहले तो दूसरे जानवर उसे एक आध गाजर चखने को दे देते। पर रोज़-रोज़ मुफ्त में उसे कौन खाने को देता?’ तुम्हारे घर के पीछे थोड़ी खाली जगह पड़ी हुई है तुम वहां पर गाजर बो क्यों नहीं देती?’ बार-बार चिंकी का अपमान होते देखकर एक दिन गोरू खरगोश ने उसे सलाह दी।

‘यह तो तुमने बहुत अच्छी बात बताई। अब जब मेरे खेत पर गाजर लगेंगी तो मुझे किसी के पास हाथ फैलाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।’ चिंकी बोली। अब तक तो चिंकी को मांग कर खाने की आदत थी इसलिए उससे मेहनत करने का कष्ट क्या होता है यह पता नहीं था। सारे कंकर पत्थर हटाकर जगह को समतल बनाना टेढ़ी खीर था। चिंकी ने किसी तरह जगह को खेती के लायक बना डाला। अब वह थक चुकी थी इसलिए उसने एक दिन गोरू से मदद मांगी।

‘मेरे इम्तिहान सर पर है इसलिए मुझे पढ़ना है तुम किसी और की मदद ले लो।’ गोरू ने साफ इनकार कर दिया तो चिंकी का मुंह लटक गया।

पास ही में एक पेड़ था उस पेड़ पर सोनू बंदर बैठा हुआ था, उसने उन दोनों की बातें सुन ली। वह जिज्ञासावश पेड़ से नीचे उतरा चिंकी ने उसे अपने पास बुलाया और खेत के काम में मदद करने को कहा।

‘मदद तो मैं कर दूंगा चिंकी, पर इसके बदले में मुझे क्या मिलेगा।’ सोनू ने पूछा तो वह बगलें झांकने लगी। ‘हर कोई मदद के बदले में कुछ न कुछ मांग रहा है।’ कुछ देने के नाम पर चिंकी ने पल्ला झाड़ लिया तो सोनू वापस पेड़ पर जा बैठा।’ अब ऐसा साथी कहां से लाऊं जो बिना कुछ लिए मेरे खेत में काम करने को राजी हो जाए!’ यह सोचकर चिंकी ऐसे साथी की खोज में निकल पड़ी।

‘मुझे ले चलो , मैं सारे काम कर दूंगा। वैसे भी मैं हर समय खाली ही रहता हूं।’ बहुत ढूंढ़ने पर उसे लल्लू बंदर मिला जो मुफ्त में हर काम करने को तैयार था। कंजूस चिंकी को ऐसा ही बुद्धू चाहिए था जो काम तो सारे करे पर बदले में कुछ ना मांगे। वह खुशी-खुशी लल्लू को अपने साथ लेकर खेत पर आ गई। ‘इस मूर्ख से तो तुम बच कर ही रहना मुझे तो यह किसी काम का नहीं लगता।’ गोरू की नजर लल्लू पर पड़ी तो उसने चिंकी को सलाह दी। ‘जाकर चुपचाप अपना काम करो मुझे तुम्हारी किसी सलाह की जरूरत नहीं है, समझे? खुद तो आए नहीं और उल्टे मुझे इसे भगाने के लिए कह रहे हो।’ चिंकी ने गोरू को चुप करा दिया।

‘देख लल्लू, मैंने गाजरें बो दी हैं। अब कुछ दिनों बाद इसमें से पौधे निकलेंगे। तुम खेत का अच्छी तरह से ध्यान रखना और इन्हें पानी देते समय इस बात का पूरा ध्यान रखना कि पानी जड़ों तक पहुंचता है या नहीं।’ पिंकी ने लल्लू को समझाया। लल्लू को काम के बारे में समझा कर चिंकी निश्चिंत हो गई। उधर लल्लू अब चिंकी के खेत का रखवाला बन चुका था। पौधे अब बड़े होने लगे थे। चिंकी ने आकर अपने खेत को देखा तो बड़ी खुश हुई कि अब उसे जल्दी ही अपनी मनपसंद मीठी लाल गाजर खाने को मिल जाएंगी।

‘जैसा मैंने कहा है वैसा तुम्हें याद है ना लल्लू? ध्यान रखना सारे पौधों को पूरा पानी मिलना चाहिए, वरना वे सूख जाएंगे।’ चिंकी ने लल्लू से कहा। ‘तुम बिल्कुल चिंता मत करो दीदी। अब यह सारी जिम्मेदारी मेरी है, तुम जाकर आराम से सो जाओ।’ लल्लू ने उत्तर दिया। पिंकी के जाने के बाद लल्लू पौधों में पानी डालने में लग गया।’ मैं इनमें इतना सारा पानी दूंगा कि वह इन पौधों की जड़ तक पहुंच जाए। कहीं ऐसा ना हो कि बिना पानी के पौधे सूख जाएं और चिंकी नाराज हो जाए।’ यह सोचकर वह हर समय उन पौधों को भरपूर पानी में डुबोये ही रखता।

इसका परिणाम यह हुआ कि ज्यादा पानी मिलने की वजह से सारे पौधे गल गए। कुछ दिनों बाद गाजरें खाने की लालसा मन में लिए चिंकी अपना खेत देखने पहुंची तो उसके होश उड़ गए। सारे पौधे गल कर नष्ट हो चुके थे। लल्लू की नासमझी ने उसकी सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया था। ‘अरे मूर्ख, तुमने यह क्या कर डाला? इतना पानी दे दिया कि सारे पौधे गल गए, अब गाजरें कहां से लगेगी?’ अपना नुकसान देखकर वह चीख पड़ी।

‘दीदी, तुमने ही तो कहा था कि पानी पौधों की जड़ तक पहुंचना चाहिए। तुम खुद ही देख लो कि पानी वहां तक पहुंचा या नहीं!’ लल्लू ने उत्तर दिया तो चिंकी गुस्से में भरकर उसे भला-बुरा कहने लगी। पैसे बचाने के लालच में मूर्ख को काम पर रखना उसे ले डूबा। शोरगुल सुनकर गोरू वहां आ पहुंचा। जब उसे हकीकत का पता चला तो वह समझ गया कि मुफ्त में काम करने वाले लल्लू की वजह से उसकी सारी फसल खराब हो चुकी है।

‘मैं जानता था यही होने वाला है ,अब भुगतो अंजाम।’ ‘मुझे क्या पता था कि थोड़े से पैसे बचाने के चक्कर में यह मूर्ख मेरा सारा नुकसान कर देगा।’ कहते हुए चिंकी ने अपना माथा पीट लिया। ‘अब पछताने से कुछ नहीं होगा। नए सिरे से अपने काम में लग जाओ और हां, इस बार किसी समझदार की मदद लेना मत भूलना।’ गोरू ने सांत्वना देते हुए चिंकी से कहा तो उसने अपनी गलती से सबक लेते हुए नयी शुरुआत करने का फैसला कर लिया।

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