दादा और पोते का प्यार जगजाहिर है। इस प्यार पर कई मुहावरे भी बने हैं। आलोच्य पुस्तक ‘गोलू मेरा दोस्त’ में भी इसी प्यार को रोचकता से प्रस्तुत किया गया है। लेखक हैं गोविंद शर्मा। उन्होंने किताब में इस प्यार के जरिये कई अनमोल सीख दी हैं। उन्होंने पुस्तक में बाल मन की जिज्ञासा के माध्यम से दादा और पोते के अटूट रिश्ते को भावुकता से व्यक्त किया है।
लेखक ने दोस्ती, ईमानदारी और साहस जैसे मूल्यों को सरल भाषा और रोचक घटनाओं के माध्यम से प्रस्तुत किया है। पुस्तक में नौ लघु कहानियां हैं, जिनके जरिये अलग-अलग मुद्दों को उठाया गया है। हर एक कहानी भावुकता से भरपूर है और एक नई सीख देती है। ‘मटका महाराज’ कहानी में यह सीख दी गई है कि हमें बच्चों से भी बहुत कुछ सीखने को मिल सकता है।
‘सड़क की सेवा’ कहानी के जरिये सड़कों की हालत का जिक्र करते हुए बताया गया है कि किस तरह बच्चे भी सड़कों को बेहतर बनाने के लिए अपना योगदान दे सकते हैं। ‘कहावत और गोलू-1’ कहानी में ‘खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदलता है’ कहावत को जिस तरह से चरितार्थ किया गया है, वह बहुत ही रोचक बन पड़ा है।
यह पुस्तक बच्चों के लिए मनोरंजक और सार्थक है, जो न केवल उनका मनोरंजन करती है, बल्कि उन्हें अच्छे संस्कार भी सिखाती है। पुस्तक से यह सीख मिलती है कि दूसरों की मदद करना एक अच्छी आदत है, मित्रता विश्वास पर टिकी होती है और हिम्मत तथा सच्चाई हमेशा जीवन में आगे बढ़ाती है। कहानी अत्यंत सरल, सहज है। छोटे वाक्य, आकर्षक वर्णन और हल्का-फुल्का हास्य इसे और रोचक बना देते हैं।
पुस्तक : गोलू मेरा दोस्त लेखक : गाेविंद शर्मा प्रकाशक : पंचशील प्रकाशन, जयपुर पृष्ठ : 48 मूल्य : रु. 150

