लेखिका आशा खत्री ‘लता’ के लघुकथा-संग्रह ‘नीलकण्ठ’ में 81 लघुकथाएं संकलित हैं। संग्रह की लघुकथा ‘दान का आनंद’ नि:स्वार्थ भाव से किए गए दान की महत्ता को रेखांकित करती है और संदेश देती है कि दान का उद्देश्य उसका प्रचार-प्रसार करना नहीं, बल्कि जरूरतमंद की सहायता करना होना चाहिए। ये लघुकथाएं हमें अपने जीवन व अपने समाज की सच्चाइयों से परिचित करवाती हैं। लेखिका ने समाज और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र, चरित्र और घटनाओं का यथावत् चित्रण किया है। लघुकथा एक ऐसी विधा है, जो कम शब्दों में विचारों की सशक्त अभिव्यक्ति प्रस्तुत करने की क्षमता रखती है।
कुछ लघुकथाएं व्यंग्यात्मक शैली में हैं, जो बहुत बड़ा संदेश दे जाती हैं। ‘जीवन चक्र’, ‘बेकद्री का दर्द’, ‘लघुकथा’, ‘सत्य का खोजी’, ‘देशभक्ति के आइकॉन’ आदि लघुकथाएं इसी श्रेणी के अंतर्गत आती हैं। ‘एक बेटी का सवाल’ लघुकथा समाज के ऊपर एक करारा तमाचा है तो दूसरी ओर ‘पोती का जन्मदिन’ सकारात्मक सोच लिए समाज को संदेश देती है कि आज के समय में लड़की-लड़के में कोई फर्क नहीं है।
‘कोई तो है मेरे शहर में’ लघुकथा लेखिका के लिए एक आशा की किरण है। जब मंत्री जी के स्वागत के लिए लोग कतार में खड़े थे, तो एक व्यक्ति ने रतन जी से कहा—‘आप यहां बैठे हैं, चलिए मंच पर। आप भी तो शहर के साहित्यकार हैं।’ रतन जी ने स्वयं को साहित्यकार मानने से इनकार करते हुए कहा कि वे तो बस यूं ही तुकबंदी कर लेते हैं। इस पर उस व्यक्ति ने कहा कि आजकल लेखन में इससे अलग होता ही क्या है। रतन जी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिस काम की गवाही उनकी आत्मा नहीं देती, वह उसे नहीं कर सकते।
वास्तव में ही लघुकथा में मारक शक्ति होती है। संग्रह में भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी पर लघुकथाएं तो हैं ही। ‘अर्द्धांगिनी’ कहानी प्रेरणा देती है कि यदि अर्द्धांगिनी चाहे, तो वह अपनी सूझबूझ से अपने पति को रिश्वत लेने वाले रास्ते से हटा सकती है। ‘मुजरिम’, ‘सच्चा झूठ’, ‘प्रद्युम्न की चीख’, ‘भुक्खड़’, ‘सही भूमिका’ आदि कई लघुकथाएं मानवीय सरोकारों से जुड़ी हुई, सशक्त, गंभीर और संवेदनाओं में मर्म तलाशती हुई सार्थक रचनाएं हैं।
पुस्तक : नीलकण्ठ (लघुकथा संग्रह) लेखिका : आशा खत्री ‘लता’ प्रकाशक : बोधि प्रकाशन, जयपुर पृष्ठ : 112 मूल्य : रु. 150.

