मेरी न्यूयॉर्क डायरी’ भारत और अमेरिका के बीच पुल का काम करती हुई एक ज्ञानवर्धक एवं रोचक किताब है। लेखिका शान्त्वना दूबे तिवारी ने न्यूयॉर्क की अपनी दो यात्राओं का बहुत ही मनोयोग से सरस चित्रण किया है। पहली यात्रा को लेखिका ने शहर को जानने की जिज्ञासा और दूसरी यात्रा को अपनी सफलता के उत्सव की संज्ञा दी है।
इस किताब के माध्यम से पाठक न्यूयॉर्क की सबवे मेट्रो, यातायात व परिवहन व्यवस्था, शैक्षिक संस्थानों, पुस्तकालयों, पार्कों, बैंकिंग, पुलों, बाज़ारों और वहां के प्रमुख सांस्कृतिक स्मारकों की जानकारी प्राप्त करने के साथ-साथ उसका आनंद भी उठाता है। अमेरिका के प्रमुख शहर, उसके विभिन्न भागों व आस-पास के स्थानों के मौजूदा स्वरूप के साथ ही इतिहास का भी परिचय मिलता है।
लेखिका का मन प्रकृति में रमता है; वे जहां से भी गुजरती हैं, वहां की भागमभाग, क्रियाओं और उधेड़बुन का वर्णन करती हैं, लेकिन जैसे ही उन्हें कोई प्राकृतिक दृश्य दिखाई देता है, वे उसके रूप-सौंदर्य का मनोरम खाका खींच देती हैं। अमेरिका की सफाई व्यवस्था व कचरे के प्रबंधन के बारे में जानकर अपने यहां की व्यवस्था के प्रति एक आलोचनात्मक दृष्टिकोण भी पैदा होता है।
यात्रा के दौरान लेखिका गगनचुंबी इमारतों, चमचमाती सड़कों व स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी के प्रतीक माने जाने वाले न्यूयॉर्क शहर की गहराई में उतरती हैं और वहां भारत व भारतीय संस्कृति की खोज करती हैं। अमेरिका में रहने वाले भारतीय लोगों से मेल-मिलाप बढ़ाने के साथ-साथ वे भारतीय खान-पान और सामान के ठिकानों की तलाश करती हैं।
भारतीय संस्कृति व अध्यात्म के केंद्र ‘अक्षरधाम मंदिर’ में जाकर उन्हें अपार आनंद व आत्मसंतोष मिलता है। न्यूयॉर्क के बारे में वे बताती हैं—‘यह शहर मानवीय प्रतिभा, अटूट परिश्रम और सपनों को सच करने की जि़द का जीता-जागता प्रमाण है।
पुस्तक : मेरी न्यूयॉर्क डायरी लेखिका : शान्त्वना दूबे तिवारी प्रकाशक : लोकभारती प्रकाशन, प्रयागराज पृष्ठ : 174 मूल्य : रु. 350.

