पुस्तक समीक्षा

‘ढाई चाल’ में वक्त का हाल

‘ढाई चाल’ में वक्त का हाल

यश गोयल

वर्तमान में ओटीटी प्लेटफार्म के सक्रिय लेखक और मार्केटिंग प्रोफेशनल नवीन चौधरी ने अपने ताजा उपन्यास ‘ढाई चाल’ में सत्ता की भागीदारी, धर्म, जाति और मीडिया पर शतरंज की मोहर बिछा कर एक गंभीर राजनीतिक कथा लिखी है, जो युवा वर्ग की व्यवस्था से जुड़े रहकर एक क्रियात्मक सोच का परिचायक है।

डायरीनुमा उपन्यास में नवीन ने समाज में हमारे आसपास रोज घट रही घटनाओं का खुला पन्ना लिखा है, जिसमें धर्म, राजनीति, मीडिया और राजनीति के गठबंधन की एक ऐसी आपराधिक कथा है, जो किसी काल्पनिक या दूर की दुनिया की नहीं लगती बल्कि आज के दौर की व्यावहारिक समस्या है।

लेखक के अनुसार यह उपन्यास पिछली और चालू शताब्दी की रोमांचक कथा है। राजनीति जो घर और रिश्तों में जड़ें पसार चुकी है, राजनीति जो हमारे समय का सबसे बड़ा मनोरंजन है, राजनीति जो कि अब थ्रिलर है। यही कारण है कि साजिश और सस्पेंस इस पुस्तक के अंतिम पृष्ठ तक पाठक को जोड़े रखता है।

इस उपन्यास में नवीन, जो जयपुर की पृष्ठभूमि से हैं, ने हिंदी पत्रकारिता के प्रशासनिक और व्यावसायिक पक्षों पर पात्रों का तानाबाना बनाया है और जिनकी शतरंजी ढाई चाल बहुत रहस्यमय और पेचदार है। इसमें एडवरटाइजिंग टीम की बारीकियां हैं। आपसी प्रतिस्पर्धा, टकराव और ईर्ष्या की बानगी है।

क्या इन सभी क्षेत्रों में रिश्ते एक शतरंज के मोहरे बनकर बर्ताव करते हैं, और क्या इंसानियत राजनीति का शिकार हो कर रह जाती है? धर्म, जाति और सत्ता के खिलाड़ी से अलग एक आम आदमी जो जीवन-उपार्जन में लगा रहता है क्या उसे इन पीड़ादायक कष्टों से बचाया जा सकता है?

पुस्तक : ढाई चाल लेखक : नवीन चौधरी प्रकाशक : राधाकृष्ण प्रकाशन, दिल्ली पृष्ठ : 191 मूल्य : रु. 199.

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