कविता सुख-दुखात्मक अनुभूतियों से शुरू होकर विचार-चिंतन से गुजरती हुई अपने खोने-पाने की तलाश में वैश्विक और शाश्वत मानव की खोज है। इस खोज में कवयित्री अपनी उभरती-मिटती भाव-अनुभूतियों और संवेदनाओं को शब्द देती हैं। इस दृष्टि से ‘खो गये हम कहां’ कविता संग्रह में संकलित 101 कविताओं में विविधवर्णी भाव-संवेदनाओं के इंद्रधनुष को देखा जा सकता है।
संग्रह के इंद्रधनुषी चित्रों में सामाजिक विसंगतियों और स्मृतियों के जरिए जीवन को पढ़ने-समझने की कोशिश है। यह जीवन-खंडहरों को पाटने-भरने की अनवरत यात्रा है। यह यात्रा स्कूल पत्रिकाओं से शुरू होकर, अहसासों को दृश्यांकित करती हुई, नारी-मन की सहज कोमल भावनाओं में जीवन का फलसफ़ा, बेबसी और युद्ध तक फैली है। यह यात्रा संस्कृति के विविध रंगों का कैनवास है। कहीं पाने की कीमत है, तो कहीं खोने का डर। कवयित्री अदिति सक्सेना ने ज़िंदगी के विस्तृत फलक के विविधवर्णी दृश्यों, अहसासों, घटनाओं और पीड़ाओं की लहरों को उकेरा है। पीछे छूट चुके अहसास को पाने की तमन्ना और भावी संसार का स्वप्न इसमें निहित है। दृश्यों को उकेरते हुए जीवन-संघर्ष में अहसासों की बनती-मिटती स्मृतियों के टूटने-पाने की तलाश में चांद पर हरियाली उगाना और गूंगी निगाहों से बात करना है।
वस्तुतः विवेच्य कविताएं जीवन-क्षणों की तलाश हैं। इनमें स्पंदित होते हुए क्षणों को सुनना और सहम जाने के बाद अंधेरे से लड़ने की ऊर्जा है। अतः कवयित्री ने जीवन के विविध रंगों को गुनगुनाया है। प्रायः सभी कविताएं ज़िंदगी के अहसासों को संजोने और संवेदनाओं के संरक्षण में जीवन की तलाश हैं।
पुस्तक : खो गये हम कहां लेखक : अदिति सक्सेना प्रकाशक : भावना प्रकाशन, दिल्ली पृष्ठ : 135 मूल्य : रु. 350.

