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रूठते स्वर और शब्द साधना

पुस्तकें मिलीं

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काशमीरी लाल चावला निरंतर जापानी साहित्य की विधाओं पर जुनूनी स्तर पर काम करते रहे हैं, जिनमें हाइकु, तांका, सेदोका, चोका, हाइगा, रेंगा और कतौता शामिल हैं। वे बताते हैं कि भारत में लोकप्रिय हाइकु विधा 1951 में आई और पंजाबी में 1997-98 में काम शुरू हुआ। समीक्ष्य कृति ‘रूठते स्वर’ में उन्होंने चौका, जेन पोइटरी, हाइबन और बुद्ध दौर की हास्यपरक रचनाओं का संकलन किया है, जिसमें जीवन की झांकी अभिव्यक्त होती है।

पुस्तक : रूठते स्वर सृजनकार : कशमीरी लाल चावला प्रकाशक : तर्कभारती प्रकाशन, बरनाला, पंजाब पृष्ठ : 80 मूल्य : रु. 150.

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रंग-बिरंगी ग़ज़लों का गुलदस्ता

अंदाज बठिंडवी, जिनका मूल नाम राजीव बजाज है, इस पुस्तक ‘इश्क में’ एक गुलदस्ता रंग-बिरंगे फूलों का, में ग़ज़लों का संग्रह पाठकों के लिए लेकर आए हैं। बकौल अंदाज, यह उनकी ग़ज़लों की पहली पुस्तक है, जिसमें कई स्थापित ग़ज़लकारों की रचनाएं संकलित हैं। उन्होंने पुस्तक को यश चोपड़ा को समर्पित किया है। दरअसल, ग़ज़ल संग्रह में 125 ग़ज़लें ग़ज़ल प्रेमियों के लिए संकलित की गई हैं। विश्वास किया जाता है कि ग़ज़ल प्रेमियों से पुस्तक को सकारात्मक प्रतिसाद मिलेगा।

पुस्तक : इश्क में सृजनकार : अंदाज बठिंडवी प्रकाशक : राजीव बजाज, बठिंडा पृष्ठ : 144 मूल्य : रु. 250.

कच्ची माटी, पक्के संकल्प

हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड से सहायक सचिव पद से सेवानिवृत्त जगदीश श्योराण की गंभीर रुचि सृजन में रही है। पत्रकारिता में डिप्लोमा करने के साथ-साथ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में उनकी कहानियां, लेख व कविताएं आदि प्रकाशित होती रही हैं। अपनी पहली कविताओं की पुस्तक ‘कच्ची माटी’ में उन्होंने जीवन के आत्मीय अहसासों को उकेरा है। उनका मानना है कि सरकारी सेवा में तमाम बंधनों के चलते वे अपनी रचनाओं को स्वतंत्र अभिव्यक्ति नहीं दे सके, परंतु पुस्तक के माध्यम से उन्हें वह सुख मिला है।

पुस्तक : कच्ची माटी सृजनकार : जगदीश श्योराण प्रकाशक : करिश्मा प्रकाशन, हिसार पृष्ठ : 75 मूल्य : रु. 150.

सृजन को ‘तवज्जो’

‘तवज्जो’ नामक पुस्तक में रचनाकार राहुल खोखर ने अपने जीवन के आत्मीय अहसास इस कविता संग्रह तवज्जो में अभिव्यक्त किए हैं। तवज्जो शीर्षक रचना में प्रस्तावना नहीं लिखी गई है, रचनाओं के क्रमांक नहीं दिए गए हैं और अंत में रचनाकार का परिचय भी नहीं है। रचनाकार के अनुसार, पुस्तक स्वर्गीय ईश्वर सिंह खोखर को समर्पित है। पहली कविता ‘पिता जी’ में इन आत्मीय अहसासों का सुंदर रूप से चित्रण किया गया है। बहरहाल, पहली कविता से लेकर अंतिम कविता ‘वृक्षों का वार्तालाप’ तक एक संवेदनशील व्यक्ति के भावों और अहसासों की गहरी छाप देखने को मिलती है।

पुस्तक : तवज्जो सृजनकार : राहुल खोखर प्रकाशक : सप्तऋषि पब्लिकेशन, चंडीगढ़ पृष्ठ : 92 मूल्य : रु. 150.

काग़ज़ात में वजूद की तलाश

समीक्ष्य पुस्तक काग़ज़ात-ए-वजूद को रचनाकार आर्यन खासा ने कुछ खास तरीके से प्रस्तुत किया है। यह उनकी पहली पुस्तक मानी जाती है, जिसमें शायरी, नज्म और ग़ज़लों का संग्रह शामिल है। लेखक के परिचय में यह उल्लेख किया गया है कि इन रचनाओं में उन्होंने अपने जीवन से जुड़ी घटनाओं और अन्य काल्पनिक विषयों पर अपनी अभिव्यक्ति व्यक्त की है। उनका कहना है कि लेखन की शुरुआत गीत लिखने से हुई और उन्होंने कुछ आने वाली पंजाबी और हिंदी फिल्मों के लिए भी गीत लिखे हैं।

पुस्तक : काग़ज़ात-ए-वजूद सृजनकार : आर्यन खासा प्रकाशक : सप्तऋषि पब्लिकेशन, चंडीगढ़ पृष्ठ : 104 मूल्य : रु. 220.

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