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सवाल, गंभीरताएं और संदर्भ

पुस्तक समीक्षा

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जीत-हार, आरोप-प्रत्यारोप की सियासत में इन दिनों इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम का मुद्दा ‘टॉप’ पर है। पत्रकार एवं लेखक संजय कुमार सिंह ने इसी मुद्दे पर किताब लिखी है, ‘ईवीएम वाशिंग मशीन में धुली।’ किताब कुल 17 अलग-अलग अध्यायों में है, लेकिन लेखक ने प्रस्तावना, भूमिका के अलावा सबसे पहले ‘ईवीएम का मामला क्यों गंभीर’ नामक शीर्षक से कई सवालों को उकेरने की कोशिश की है। कहा जा सकता है कि इन्हीं बिंदुओं को आगे चलकर विस्तारित किया गया है। लेखक का मानना है कि ईवीएम संबंधी शिकायतें ऐसे ही नहीं हो रही हैं। इसमें कुछ तो गड़बड़झाला है। यानी धुआं उठा है तो कहीं थोड़ी-बहुत आग है जरूर।

किताब में इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया गया है कि जब भाजपा विपक्ष में थी तो वह भी ईवीएम से मतदान कराने के खिलाफ थी। साथ ही लेखक ने ईवीएम पर सवाल उठाने या इसके पक्ष में तर्क रखने वालों पर हुए ‘एक्शन’ का भी जिक्र किया है। लेखक ने विभिन्न घटनाक्रमों के माध्यम से अपनी राय रखी है। हालांकि, यह संदर्भगत लेखन की जरूरत थी या कुछ और, यह स्पष्ट नहीं है, लेकिन कई घटनाक्रमों का दोहराव हुआ है। यह दोहराव कहीं-कहीं अखरता है।

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वैसे, सहज और सरल अंदाज में लिखी पुस्तक में ईवीएम पर उठते रहे सवालों और कालांतर में उसमें कुछ सुधारों की चर्चा करते हुए यह स्थापित करने की कोशिश की गई है कि उलझाव तो है। इसके अलावा, चुनाव आयोग पर भी सवाल उठाए गए हैं। पुस्तक में इस बात को उठाने की पुरजोर कोशिश है कि सवाल उठे हैं तो उनका जवाब सामने आना चाहिए, यही लोकतंत्र की खूबी है। कुछ अखबारों और चैनलों की खबरों के शीर्षकों का हवाला भी दिया गया है। ईवीएम मुद्दे पर लिखी गई यह किताब निश्चित रूप से चर्चा का विषय बन सकती है।

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पुस्तक : ईवीएम वॉशिंग मशीन में धुली लेखक : संजय कुमार सिंह प्रकाशक : प्रवासी प्रेम पब्लिशिंग, गाजियाबाद, पृष्ठ : 147 मूल्य : रु. 320.

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