हरीश कुमार का ‘अतीत का वर्तमान’ उनका नवीनतम कहानी संग्रह है। इस संग्रह की सभी कहानियों में लगभग रोज़मर्रा की ज़िंदगी की छोटी-छोटी व्यथाएं दर्ज की गई हैं। कथाकार ने ज़िंदगी की जटिलताओं का ताना-बाना भव्यता से बुना है।
‘ज़िंदगी की ज़मीन’ कहानी में कथाकार ने अपनी पत्नी की अस्वस्थता के चलते छोटी-छोटी बारीकियां दर्ज की हैं। ‘कड़वे सच’ कहानी में दिनभर सवारी लेने वाले ऑटो चालकों की मनमानी से लेखक क्षुब्ध हैं, जिसमें यह दिखाया गया है कि किस तरह सस्ती सवारी के लिए चार पैसे बचाने की फिराक में आदमी कठपुतली बन जाता है। ‘प्रेम कहानी’ एक साधारण कहानी है। ‘केक’ कहानी में एक परिवार के केक प्राप्ति के छीजते सपनों का चित्रण है, जिसमें घर में केक का आना किसी सपने से कम नहीं लगता। ‘भिखारी’ कहानी में कथानक के पास अपार धन होने के बावजूद अपनी मां के ऑपरेशन के लिए पैसे मांगने की स्थिति उसे भीतर से कचोटती है। ‘झींगुर’ कहानी भी बहुत साधारण और प्रभावहीन कहानी है।
‘अतीत का वर्तमान’ संग्रह की महत्वपूर्ण कहानी है, जिसमें कथानायक का अपनी सेवानिवृत्ति के बाद पुराने दफ़्तर में जाना और उस कुर्सी पर विराजमान अधिकारी द्वारा उसे नज़रअंदाज़ करने के कई छोटे-छोटे क्षण प्रस्तुत किए गए हैं, जो अपनी कुर्सी पर जमने का भौंडापन दर्शाते हैं। इसी तरह, ‘अंगारे’ कहानी में भी भुरभुराती पारिवारिक परिस्थितियों का चित्रण है। कहानी में कथानायक की बेटी श्वेता की आत्महत्या का प्रसंग कहानी का मुख्य बिंदु बनता है।
कथाकार की दृष्टि केवल पारिवारिक जटिलताओं तक ही सीमित है, इसलिए अधिकांश कहानियों का खांचा परिवारजन ही हैं। ‘अस्तित्व’ कहानी में कथानायक की बिटिया के असमय अवसान की दारुण स्मृतियां दर्ज की गई हैं। संग्रह की अन्य कहानियां भी पारिवारिक पृष्ठभूमि को उकेरती हुई साधारण कहानियां हैं।
पुस्तक : अतीत का वर्तमान लेखक : हरीश कुमार ‘अमित’ प्रकाशक : वनिका पब्लिकेशंस, नयी दिल्ली पृष्ठ : 123 मूल्य : रु. 300.

